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By: Yogendra Singh

Chhindwara : अतरिया संकुल में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला निर्भयपुर में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है। स्कूल में पदस्थ शिक्षिका माया परतेती अपने निर्धारित समय से केवल दो घंटे ही उपस्थित रहती हैं और शेष समय स्कूल की जिम्मेदारी अतिथि शिक्षक पर छोड़ देती हैं। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

महज दो घंटे की उपस्थिति और शिक्षा व्यवस्था में खामियां

Chhindwara सूत्रों के अनुसार, शिक्षिका माया परतेती सुबह 11 बजे स्कूल आती हैं और दोपहर 1 बजे स्कूल छोड़ देती हैं। इस दौरान स्कूल की पूरी जिम्मेदारी एक अतिथि शिक्षक के हाथ में रहती है। अभिभावकों का कहना है कि केवल दो घंटे की उपस्थिति में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं है। स्कूल में पढ़ाई की नियमितता बाधित होने के कारण छात्रों की सीखने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

अधिकारियों की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल

Chhindwara स्कूल में चल रही यह स्थिति शिक्षा विभाग और अतरिया संकुल प्राचार्य की नजरों के सामने होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अभिभावकों और ग्रामीणों ने बताया कि बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस निष्क्रियता से स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं और बच्चों के भविष्य को खतरा बनता दिख रहा है।

ग्रामीणों की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

Chhindwara ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षिका के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्कूल में सुधार नहीं किया गया तो बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने स्कूल प्रशासन को भी चेतावनी दी है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति और शैक्षणिक व्यवधान की स्थिति को गंभीरता से लिया जाए।

स्थानीय समाजसेवी और शिक्षक भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं। उनका मानना है कि बच्चों की शिक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। शिक्षा विभाग से आग्रह किया गया है कि स्कूल में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए।

इस घटना ने न केवल बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि यह भी दिखाया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और प्रशासनिक उदासीनता से किस तरह शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और स्कूल में सीखने का माहौल पुनः स्थिर हो सके।

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