Katihar Katihar 
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By: Ishu Kumar

Katihar : जिले से शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। समेली प्रखंड स्थित आदर्श मध्य विद्यालय, खैरा में बच्चों के मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) के लिए आए चावल की कथित हेराफेरी ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। आरोप है कि स्कूल से बच्चों के लिए निर्धारित चावल को ऑटो के जरिए बाहर ले जाया जा रहा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और स्कूल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई।

मामले में प्रभारी प्रधानाध्यापक भोला प्रसाद मंडल पर गंभीर आरोप लगे हैं। घटना 2 फरवरी की बताई जा रही है, जब ग्रामीणों ने चावल को ऑटो में लादते देखा और तत्काल विरोध जताया।

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

Katihar मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस टीम में प्रखंड विकास पदाधिकारी, सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी और मध्यान्ह भोजन योजना के साधनसेवी को शामिल किया गया।

जांच के दौरान स्कूल से जुड़े अभिलेखों की बारीकी से पड़ताल की गई, जिसमें ओवरराइटिंग, प्रविष्टियों में छेड़छाड़ और कई संदिग्ध विसंगतियां सामने आईं। जांच टीम ने ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बयान भी दर्ज किए, जिनसे यह संकेत मिला कि एमडीएम चावल को गलत तरीके से हटाने का प्रयास किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी इसी विद्यालय को लेकर मध्यान्ह भोजन सामग्री में गड़बड़ी की शिकायतें मिल चुकी थीं।

Katihar हेडमास्टर की सफाई खारिज, एफआईआर दर्ज

Katihar प्रभारी प्रधानाध्यापक भोला प्रसाद मंडल ने अपने बचाव में दावा किया कि चावल को दूसरे स्कूल से उधार लिया जा रहा था। हालांकि, संबंधित स्कूल प्रशासन ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही और संभावित गबन का मामला माना।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने पुष्टि की कि पोठिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी राहुल चंद्र चौधरी ने बताया कि प्रधानाध्यापक के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभागीय व कानूनी कार्रवाई जल्द पूरी की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Katihar बच्चों के भोजन से जुड़ी योजना में इस तरह की अनियमितता ने पूरे इलाके में नाराजगी पैदा कर दी है। अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामला सामने नहीं आता, तो बच्चों के अधिकारों के साथ बड़ा अन्याय होता। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में निगरानी और कड़ी की जाएगी।

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