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Schools: अनुपालन न करने पर मान्यता रद्द करने का निर्देश, दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं की भी व्यवस्था जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी 2026 को देश के सभी स्कूलों के लिए एक अहम और समाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त में सैनेटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग वॉशरूम बनाना जरूरी है। यदि कोई स्कूल इन आदेशों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

Schools: आदेश के प्रमुख निर्देश

  1. फ्री पैड की सुविधा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान लड़कियों को सैनिटरी पैड न मिलना उनकी पढ़ाई और स्कूल गतिविधियों में बराबरी से भाग लेने के अधिकार को प्रभावित करता है। यह अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन माना गया है।
  2. अलग टॉयलेट की व्यवस्था: लड़कियों और लड़कों के लिए अलग वॉशरूम होना संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) का हिस्सा है। इससे लड़कियों को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलेगा।
  3. दिव्यांग अनुकूल टॉयलेट: अदालत ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया कि डिसेबल-फ्रेंडली टॉयलेट बनाए जाएं, ताकि दिव्यांग छात्रों को टॉयलेट उपयोग में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

पृष्ठभूमि और याचिका

यह आदेश केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को देशभर में लागू करने की मांग पर चार साल से चल रही सुनवाई के बाद आया है। सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने 2022 में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि मासिक धर्म के दौरान कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं क्योंकि उनके परिवार पैड खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।

सामाजिक और शैक्षणिक महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़कियों के शरीर को अक्सर बोझ की तरह देखा जाता है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। यह आदेश न केवल कानूनी रूप से बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी अत्यंत जरूरी है। इससे स्कूल में लड़कियों की पढ़ाई और भागीदारी में सुधार होगा और उन्हें सम्मानजनक शिक्षा का अवसर मिलेगा।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लड़कियों की शैक्षणिक समानता, स्वास्थ्य और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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