DiplomacyDiplomacy
Spread the love

Diplomacy: बदलती वैश्विक व्यवस्था में एक अहम समझौता

आज जब विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, संरक्षणवाद और व्यापारिक तनावों से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न मुक्त व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। यह केवल आयात-निर्यात से जुड़ा समझौता नहीं, बल्कि भारत की दूरदर्शी विदेश नीति और परिपक्व वैश्विक सोच का परिचायक है। यह समझौता उस दौर में हुआ है जब कई देश सहयोग के बजाय टकराव की नीति अपना रहे हैं।

Diplomacy: बहुध्रुवीय विश्व में भारत की रणनीतिक पसंद

अमेरिका सहित कुछ वैश्विक शक्तियों द्वारा आयात शुल्क और व्यापार प्रतिबंधों को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किए जाने से वैश्विक व्यापार व्यवस्था दबाव में है। ऐसे वातावरण में भारत का यूरोपीय संघ के साथ गहन साझेदारी करना यह दर्शाता है कि भारत किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहता। भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलित, विश्वसनीय और दीर्घकालिक साझेदारियों को प्राथमिकता दे रहा है, जो उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है।

Diplomacy: घरेलू हितों के साथ खुला बाजार

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारों और प्रीमियम उत्पादों पर शुल्क में आंशिक कटौती है। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर कीमतें मिलेंगी, वहीं प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बाजार में गुणवत्ता का स्तर भी सुधरेगा। साथ ही स्थानीय असेंबली, आयात सीमा और अन्य शर्तों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि भारतीय उद्योगों, रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र के हित सुरक्षित रहें।

भारतीय निर्यात और रोजगार को नई गति

मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय उत्पादों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के बाजारों तक व्यापक पहुंच मिलेगी। कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ होने की संभावना है। इससे निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नया संबल मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत का सशक्त कदम

राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से यह समझौता भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का सशक्त संदेश देता है। यह स्पष्ट करता है कि भारत व्यापार और तकनीक को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की राजनीति से दूर रहकर सहयोग, संवाद और सहअस्तित्व की राह पर चलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे “साझा समृद्धि का रोडमैप” बताना इसके व्यापक प्रभाव को रेखांकित करता है। निवेश, नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारत को वैश्विक उत्पादन और संपर्क का प्रमुख केंद्र बना सकता है।

सामाजिक और दीर्घकालिक प्रभाव

इस समझौते का प्रभाव केवल आर्थिक नहीं रहेगा। शिक्षा, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से भारत के मानव संसाधन को वैश्विक अवसर मिलेंगे। उपभोक्ताओं के लिए बेहतर विकल्प और उच्च मानक उपलब्ध होंगे। दीर्घकाल में यह समझौता भारत की समावेशी विकास यात्रा को अंतरराष्ट्रीय समर्थन देगा और नागरिकों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार की नींव रखेगा।

Also Read This: Strategy: ‘विश्व व्यवस्था’ का भ्रम और शक्ति-संतुलन में भारत की रणनीति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *