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Republic Day: 26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है, जब देश ने अपने संविधान को लागू कर स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। यह संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशाओं, आकांक्षाओं और संघर्षों का प्रतिबिंब है। संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को राष्ट्र को समर्पित यह ग्रंथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी देता है तथा समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करता है।

Republic Day: विविधता में एकता: भारत की पहचान

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता है। भाषा, संस्कृति, धर्म और परंपराओं की भिन्नता के बावजूद राष्ट्रीय एकता बनाए रखना हमारी विशेषता रही है। विश्व के अनेक विचारकों ने भारतीय संविधान को उभरते लोकतंत्रों के लिए प्रेरणास्रोत माना है, क्योंकि यह विविधताओं के सम्मान के साथ सह-अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करता है।

Republic Day: राष्ट्रीय चेतना और समकालीन चुनौतियाँ

वर्तमान समय में भारत अनेक आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। योजनाबद्ध ढंग से सामाजिक विभाजन, संस्थाओं के प्रति अविश्वास और सांस्कृतिक आत्महीनता का भाव उत्पन्न करने के प्रयास हो रहे हैं। जनसांख्यिकीय असंतुलन, अवैध घुसपैठ, कट्टरवाद और हिंसक विचारधाराएँ लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर चुनौती हैं। इतिहास गवाह है कि जनसंख्या संतुलन और सांस्कृतिक चेतना किसी भी राष्ट्र के भविष्य को दिशा देती है।

लोकतंत्र की रक्षा में नागरिकों की भूमिका

लोकतंत्र केवल सरकारों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से सशक्त होता है। संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास, कानून के शासन का सम्मान और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति सतर्कता प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। विकास, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देकर ही भारत को सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकता है।

कर्तव्य पथ पर अग्रसर भारत

परिवारवाद, भ्रष्टाचार और हिंसा से मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब हम अपने कर्तव्यों को अधिकारों के समान महत्व दें। नक्सलवाद, कट्टरता और अराजकता के विरुद्ध सामूहिक संकल्प आवश्यक है। गणतंत्र दिवस का यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि संविधान का सम्मान करते हुए, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी—यही प्रत्येक भारतीय का सच्चा कर्तव्य है।

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