Morena: नगरा घाट पर खुलेआम अवैध खनन
चम्बल नदी का जल स्तर कम होते ही एक बार फिर बजरी माफिया सक्रिय हो गए हैं।
राजघाट पुल से लेकर पोरसा के नगरा घाट तक कई स्थानों पर दिनदहाड़े रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
हालात ऐसे हैं कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रेत लेकर निकल रही हैं।
Morena: जल स्तर घटते ही शुरू हुआ अवैध उत्खनन
बारिश का मौसम खत्म होने के बाद दिसंबर से चम्बल नदी का जल स्तर लगातार नीचे जाता है।
जनवरी के पहले सप्ताह तक नदी अपनी सामान्य धारा में सिमट जाती है।
उसके बाद दोनों किनारों पर बड़ी मात्रा में रेत बाहर आ जाती है।
इसी का फायदा उठाकर बजरी माफिया सक्रिय हो जाते हैं।
Morena: राजघाट से नगरा घाट तक कई अवैध घाट
राजघाट पुल से पोरसा के नगरा घाट तक एक दर्जन से अधिक अस्थायी घाट बनाए गए हैं।
इन स्थानों पर माफिया बिना किसी डर के रेत की खुदाई कर रहे हैं।
नगरा घाट पर तो भारी मशीनें, खासकर जेसीबी, लगाकर बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है।

सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से रोजाना परिवहन
जानकारी के अनुसार, नगरा घाट पर रात करीब तीन बजे से रेत की खुदाई शुरू हो जाती है, जो सुबह नौ बजे तक चलती है। इस दौरान सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत भरकर पोरसा, अंबाह, रजौधा और गोरमी जैसे इलाकों की ओर रवाना हो जाती हैं। पोरसा को रेत की सबसे बड़ी मंडी बताया जा रहा है।

पर्यावरण और आमजन पर गंभीर असर
अवैध खनन से चम्बल के जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
वहीं सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
रेत से भरे तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण सड़क हादसों का खतरा भी लगातार बना हुआ है, जिससे आम लोग दहशत में हैं।
पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि नगरा थाना क्षेत्र के सामने से रोजाना रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गुजरती हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। लोगों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के पीछे कथित रूप से नियमित वसूली का खेल चल रहा है, जिससे माफिया बेखौफ होकर अवैध खनन कर रहे हैं।
निष्कर्ष
चम्बल क्षेत्र में बजरी माफिया का बढ़ता आतंक न केवल पर्यावरण और सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग सख्त कदम उठाएं, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग सके।
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