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Chhatarpur: शासकीय भूमि घोटाले का खुलासा

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से जमीन फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

यहां एक मृत व्यक्ति को दस्तावेजों में जीवित दिखाकर शासकीय भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई।

बाद में उसी जमीन को करोड़ों में बेचने की कोशिश की गई।

Chhatarpur: बमीठा थाना क्षेत्र में सामने आया मामला

यह मामला छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र का है, जहां सरकारी जमीन की अवैध बिक्री से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।

जांच में सामने आया कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर हेरफेर की गई।

Chhatarpur: मृत व्यक्ति को कागजों में दिखाया गया जीवित

जानकारी के अनुसार, रामसेवक तिवारी की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी।

इसके बावजूद वर्ष 2013 में उनके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें जीवित दर्शाकर शासकीय भूमि की रजिस्ट्री निजी व्यक्तियों के नाम करवा दी गई।

स्थानीय निवासी की शिकायत से खुला राज

इस पूरे मामले का खुलासा स्थानीय निवासी ओमप्रकाश पाठक की शिकायत के बाद हुआ।

शिकायत के आधार पर वर्ष 2024 में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और दस्तावेजों की जांच शुरू की।

जमानत के बाद फिर जमीन बेचने की कोशिश

आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी जमानत पर बाहर आए और दिसंबर 2025 में उसी जमीन को करीब दो करोड़ रुपये में एक निजी कंपनी को बेचने का प्रयास किया।

इस प्रयास के बाद मामला और गंभीर हो गया।

पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया

पुलिस ने दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कैसे की गई।

निष्कर्ष
यह मामला सरकारी जमीनों की सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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