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Agra: सूचना के शोर में सत्य को पहचानने की जरूरत

प्रसिद्ध कथावाचक ऋतेश्वर महाराज ने आगरा में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि सोशल मीडिया के इस तेज़ युग में सबसे बड़ी चुनौती सही बात को सुनना और समझना है। उन्होंने कहा कि सूचनाओं की अधिकता के बीच सत्य को पहचानने की क्षमता ही व्यक्ति और राष्ट्र दोनों को सही दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

Agra: विचारों की सुरक्षा से ही समाज में संतुलन

ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति अपने विचारों और मूल्यों की रक्षा करता है, तो उसका निजी जीवन संतुलित रहता है।

यही संतुलन आगे चलकर पूरे समाज में सकारात्मकता और आनंद का वातावरण तैयार करता है।

उनके अनुसार, राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि विचारधारा से जुड़ी होती है।

Agra: सनातन मूल्यों और राष्ट्रबोध की अहमियत

उन्होंने स्पष्ट किया कि राम और कृष्ण की कथाओं तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है।

उनके जीवन से जुड़े राष्ट्रबोध और कर्तव्यबोध को आत्मसात करना जरूरी है।

समाज को यह समझना होगा कि धर्म का उद्देश्य मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और मर्यादित बनाना है।

संविधान, धर्म और मानव कल्याण का संबंध

संविधान को लेकर चल रही चर्चाओं पर बोलते हुए ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि बदलाव को लेकर बेवजह भ्रम फैलाया जाता है।

इसमें में समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार नियमों में परिवर्तन स्वाभाविक है।

उनके शब्दों में, “धर्म मनुष्य के लिए बना है, न कि मनुष्य धर्म के लिए,” और हर व्यवस्था का केंद्र मानव कल्याण होना चाहिए।

युवा पीढ़ी, शिक्षा और संस्कृति का संतुलन

ऋतेश्वर महाराज ने शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा को जीवन की आधारशिला बताते हुए कहा कि शिक्षा में संस्कारों का समावेश आवश्यक है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति के संतुलन पर जोर दिया।

GEN G यानी को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय युवा अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति सजग है।

यही जागरूकता भविष्य में राष्ट्र को और अधिक सशक्त बनाएगी।

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