Chitrakoot: चित्रकूट में फंसा 400 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट, अधर में लटका ‘वनवासी रामलोक’ का सपना
धर्मनगरी चित्रकूट को उज्जैन के भव्य महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की योजना फिलहाल धीमी रफ्तार का शिकार हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वनवासी रामलोक’ परियोजना अब तक जमीन पर साकार होती नजर नहीं आ रही है। विकास कार्यों में देरी के चलते करीब 400 करोड़ रुपये की यह योजना अटकी हुई है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों में निराशा है।
Chitrakoot: भगवान राम के वनवास से जुड़ी थी पूरी अवधारणा
इस परियोजना का उद्देश्य भगवान श्रीराम के 11 वर्षों के वनवास काल से जुड़े प्रसंगों को एक ही परिसर में जीवंत रूप में प्रस्तुत करना था। योजना के तहत करीब 5 एकड़ क्षेत्र में एक ऐसा सांस्कृतिक केंद्र विकसित किया जाना था, जहां रामायण से जुड़े प्रसंगों को कलात्मक झांकियों, भव्य प्रतिमाओं और दर्शनीय संरचनाओं के माध्यम से दिखाया जा सके।
Chitrakoot: बड़ा बजट, लेकिन प्रगति धीमी
राज्य सरकार ने चित्रकूट के धार्मिक और पौराणिक महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए इस परियोजना को मंजूरी दी थी।
इसके अंतर्गत
- विशाल राम प्रतिमा का निर्माण
- भव्य दरबार और सांस्कृतिक परिसर
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली संरचनाएं
शामिल हैं।
हालांकि, नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालित इस योजना की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाई है।
राम वन गमन पथ और कनेक्टिविटी पर फोकस
चित्रकूट को अयोध्या, छत्तीसगढ़ और अमरकंटक से जोड़ने के लिए राम वन गमन पथ पर काम जारी है।
इसके साथ ही क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए कई अन्य परियोजनाएं भी चल रही हैं।
- देवांगना पहाड़ी पर एयरपोर्ट विकसित किया जा रहा है, जिससे प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या से सीधी हवाई सुविधा मिलेगी।
- चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन को करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से अयोध्या रेलवे स्टेशन की तर्ज पर आधुनिक बनाया जा रहा है।
धर्मनगरी के समग्र विकास की योजना
चित्रकूट के संपूर्ण कायाकल्प के लिए शहरी विकास विभाग ने लगभग 5000 करोड़ रुपये का एकीकृत विकास प्लान तैयार किया है। इसमें
- मंदाकिनी नदी की सफाई
- रामघाट का सौंदर्यीकरण
- सड़कों का चौड़ीकरण
- कामतानाथ परिक्रमा पथ का सुव्यवस्थित विकास
जैसे कार्य शामिल हैं।
प्रशासन का दावा: विकास जारी है
सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के अनुसार, चित्रकूट के एकीकृत विकास की योजना पर काम किया जा रहा है।
वनवासी रामलोक भी इसी व्यापक परियोजना का हिस्सा है।
प्रशासन का कहना है कि विभिन्न स्तरों पर विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं।
निष्कर्ष
महाकाल लोक की तर्ज पर बनने वाला रामलोक चित्रकूट को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बना सकता है।
फिलहाल यह महत्वाकांक्षी परियोजना धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
यदि काम में तेजी लाई जाती है, तो चित्रकूट आने वाले समय में देश के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है।
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