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India: भारत में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच शांति बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके पीछे ऐतिहासिक घटनाओं, वैचारिक मतभेदों और सामाजिक-सांस्कृतिक कारणों का मिश्रण है।

India: सोमनाथ और ऐतिहासिक यादें

प्रधानमंत्री ने हाल ही में सोमनाथ मंदिर के इतिहास का स्मरण करते हुए बताया कि इस मंदिर की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों की बाजी लगाई। सोमनाथ महादेव मंदिर पर ध्वजारोहण आज भी भारत की शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक है। हालांकि, यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि क्या पुराने आक्रांता जैसे गजनी और औरंगजेब की मानसिकता समाप्त हो गई, या उनका वैचारिक प्रभाव आज भी मौजूद है।

India: वैश्विक और ऐतिहासिक आतंकवाद

इतिहास और वर्तमान घटनाएँ दिखाती हैं कि कट्टरता और हिंसक मानसिकता आज भी मौजूद है। 1980–2025 के दौरान कश्मीरी पंडितों का पलायन, मुंबई 1993 बम धमाके, 26/11 मुंबई हमला, पेरिस और ब्रसेल्स में आतंकी घटनाएं इसके उदाहरण हैं। ये घटनाएँ वैचारिक ‘रक्तबीजों’ की उपस्थिति को प्रमाणित करती हैं।

भारत पर इस्लामी आक्रमणों के कारण

भारत पर इस्लामी हमलों के दो मुख्य उद्देश्य थे:

  1. अपार धन-संपत्ति की लूट
  2. धार्मिक जिम्मेदारी (जिहाद) की पूर्ति

गजनवी, तैमूर और बाबर जैसे आक्रांताओं ने स्पष्ट रूप से हिंदू मंदिरों और मूर्तियों को नष्ट करने का दावा किया। उनके अभियान न केवल व्यक्तिगत सनक थे, बल्कि व्यापक धार्मिक और राजनीतिक मान्यता से समर्थित थे।

वैचारिक और सामाजिक मतभेद

हिंदू सभ्यता बहुलतावादी और सह-अस्तित्व आधारित रही, जबकि इस्लामिक विचारधारा में ‘मैं ही सच्चा, बाकी झूठे’ जैसी मानसिकता रही। यह दृष्टिकोण न केवल गैर-मुस्लिमों के प्रति, बल्कि अपने ही मुस्लिम समुदाय के भीतर भी संघर्ष पैदा करता है। परिणामस्वरूप, इतिहास और गर्व के प्रश्न आज भी दोनों समुदायों के बीच तनाव का कारण हैं।

समाधान की दिशा

शांति तभी संभव है जब इतिहास के साथ ईमानदारी बरती जाए, झूठे नैरेटिव और घृणा फैलाने वाली मानसिकताओं को चुनौती दी जाए। जबकि ईसाई समुदाय ने ऐतिहासिक त्रासदियों पर पश्चाताप की प्रक्रिया अपनाई है, हिंदू-मुस्लिम रिश्तों में यह आवश्यक है कि खुले संवाद और वैचारिक समीक्षा से समझ और सह-अस्तित्व की नींव मजबूत की जाए।

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