Chhattisgarh Paddy scamChhattisgarh Paddy scam
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Chhattisgarh Paddy scam: छत्तीसगढ़ में धान संग्रहण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कबीरधाम के बाद अब महासमुंद जिले के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र से भी भारी मात्रा में धान गायब होने का मामला सामने आया है। यहां करीब 18,433 क्विंटल धान का कोई अता-पता नहीं है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 5.71 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

Chhattisgarh Paddy scam: 10 महीनों में गायब हुआ हजारों क्विंटल धान

जानकारी के अनुसार, बागबाहरा संग्रहण केंद्र में यह धान करीब 10 महीनों की अवधि में गायब हुआ। अधिकारियों की ओर से इसके लिए चूहे, दीमक, चिड़िया और कीटों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले कबीरधाम जिले में भी लगभग 7 करोड़ रुपये के धान के नुकसान का मामला सामने आया था, जहां कथित तौर पर चूहों द्वारा धान खाए जाने की बात कही गई थी।

Chhattisgarh Paddy scam: स्टॉक में 3.65 प्रतिशत की कमी

बागबाहरा धान संग्रहण प्रभारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 के दौरान केंद्र में कुल 12.63 लाख बोरा धान की आवक हुई थी।

आवक के समय धान में नमी का स्तर करीब 17 प्रतिशत था, जबकि जावक के समय यह घटकर 10 से 11 प्रतिशत रह गया। लंबे समय तक धान के संग्रहण में रहने के कारण कुल स्टॉक में 3.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

नुकसान की वजहें गिनाईं गईं

संग्रहण केंद्र के अधिकारियों का दावा है कि—

  • दीमक, कीट, चूहे और चिड़ियों ने धान को नुकसान पहुंचाया
  • बारिश के दौरान कीचड़ और नमी से कुछ धान खराब हुआ
  • 10 महीने तक खुले या असुरक्षित हालात में रखे जाने से स्टॉक घटता चला गया

हालांकि, इतनी बड़ी मात्रा में नुकसान को लेकर ये तर्क संदेह के घेरे में हैं।

नियम क्या कहते हैं?

अधिकारियों के अनुसार, धान संग्रहण के नियमों में स्पष्ट प्रावधान हैं—

  • 1 प्रतिशत तक कमी होने पर कारण बताओ नोटिस
  • 2 प्रतिशत तक कमी होने पर विभागीय जांच
  • 3.65 प्रतिशत या उससे अधिक कमी होने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य

इसके बावजूद बागबाहरा केंद्र में 3.65 प्रतिशत कमी सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर महासमुंद कलेक्टर विनय लंगेह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें फिलहाल इस प्रकरण की विस्तृत जानकारी नहीं है।

उन्होंने बताया कि मार्कफेड के जिला प्रबंधक (DMO) से जानकारी ली जाएगी और यदि किसी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई पर उठते सवाल

हालांकि, नियमों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान होने के बावजूद अब तक न तो निलंबन हुआ है और न ही एफआईआर दर्ज की गई है।

इससे प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं और यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं यह मामला केवल चूहे-चिड़िया-दीमक के नाम पर दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।

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