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By: Ravindra Sikarwar

Gwalior: जीवाजी विश्वविद्यालय कैंपस में प्रधानमंत्री उषा योजना के अंतर्गत 6 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन बालिका छात्रावास (गर्ल्स हॉस्टल) को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम की ओर से भवन निर्माण की अनुमति न होने के कारण कार्य स्थगित कराने की कार्रवाई के दौरान स्थिति उलझ गई, जिसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों ने निगम अमले को कथित तौर पर बंधक बनाने की कोशिश की।

Gwalior: निर्माण कार्य की शुरुआत और सरकारी योजना

प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में बालिका छात्राओं के लिए नया हॉस्टल बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 6 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य छात्राओं को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। निर्माण कार्य कुछ समय से चल रहा था, लेकिन नियमों का पालन न होने के कारण यह विवाद का विषय बन गया।

Gwalior: नगर निगम की कार्रवाई और नोटिस

ग्वालियर नगर निगम ने पाया कि हॉस्टल निर्माण के लिए आवश्यक भवन अनुज्ञा (निर्माण स्वीकृति) नहीं ली गई है। नियमों के उल्लंघन को देखते हुए निगम ने 31 दिसंबर को पहले ही निर्माण रोकने का नोटिस जारी कर दिया था। जब विश्वविद्यालय की ओर से काम जारी रखा गया, तो शुक्रवार शाम निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्यवाही शुरू की। टीम ने निर्माण सामग्री जब्त करने की कोशिश की।

घटनास्थल पर तनावपूर्ण माहौल

निगम अमले द्वारा कार्य रोकने और सामग्री जब्त करने के प्रयास के दौरान विश्वविद्यालय के गार्डों तथा मौजूद कर्मचारियों ने कैंपस गेट पर ताला लगा दिया। इससे निगम टीम अंदर फंस गई। स्थिति गंभीर होने पर निगम अधिकारियों को सूचित किया गया। अपर आयुक्त सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन ताला न खुलने पर अंततः उन्हें ताला तोड़कर बाहर निकलना पड़ा। इस घटना ने प्रशासनिक स्तर पर तनाव को बढ़ा दिया।

कमिश्नर का बयान और आगे की कार्रवाई

नगर निगम कमिश्नर संघप्रिय ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण के लिए अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई, जिसके कारण यह अवैध माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले दिए गए नोटिस की अवहेलना की गई, इसलिए शुक्रवार को सख्त कदम उठाया गया। कमिश्नर ने कहा कि मामले में विधिवत कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

यह घटना विश्वविद्यालय और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है, जिससे छात्रावास निर्माण जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। आगे की जांच और कार्रवाई से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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