By: Ravindra Sikarwar
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक को 2026 के अंत तक देशभर में रोल आउट किया जाएगा। यह प्रणाली वाहनों को एक-दूसरे से सीधे संवाद करने की क्षमता प्रदान करेगी, जिससे दुर्घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।
V2V तकनीक क्या है और कैसे काम करती है?
V2V यानी व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन एक वायरलेस तकनीक है, जिसमें वाहन बिना किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के आपस में जानकारी साझा करते हैं। यह रेडियो सिग्नल के जरिए काम करती है और वाहनों की गति, स्थान, ब्रेकिंग तथा त्वरण जैसी जानकारियां रीयल-टाइम में आदान-प्रदान करती है।
इस प्रणाली में हर वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत करीब 4,000 रुपये है। यह यूनिट 360 डिग्री कवरेज प्रदान करेगी, यानी वाहन के हर तरफ से सिग्नल भेजेगी और प्राप्त करेगी। इससे चालक को ब्लाइंड स्पॉट, अचानक ब्रेक लगने या आगे खड़े वाहन की सूचना पहले ही मिल जाएगी।
दुर्घटनाओं पर कैसे लगाम लगाएगी यह प्रणाली?
भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें करीब 1.8 लाख लोगों की जान जाती है। इनमें से कई दुर्घटनाएं घने कोहरे में चेन रिएक्शन से या पीछे से टक्कर मारने से होती हैं। गडकरी जी के अनुसार, V2V तकनीक विशेष रूप से कोहरे, खराब दृश्यता या सड़क पर खड़े वाहनों से होने वाली टक्करों को रोकने में प्रभावी होगी।
यह एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के साथ मिलकर काम करेगी। कुछ प्रीमियम वाहनों में पहले से सेंसर-आधारित ADAS मौजूद है, लेकिन V2V नेटवर्क-मुक्त होने के कारण ज्यादा विश्वसनीय होगी।
रोलआउट की योजना और तैयारी
दूरसंचार विभाग (DoT) ने V2V के लिए 5.875-5.905 GHz बैंड में 30 MHz स्पेक्ट्रम आवंटित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। शुरू में यह नई कारों में वैकल्पिक रूप से लगाई जाएगी, बाद में पुराने वाहनों में रेट्रोफिटमेंट के जरिए और अंततः सभी वाहनों (कार, ट्रक, बस आदि) में अनिवार्य कर दी जाएगी।
यह घोषणा राज्य परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक के बाद की गई, जहां इस तकनीक पर विस्तार से चर्चा हुई। मोटर व्हीकल एक्ट में 61 संशोधनों के माध्यम से इसे कानूनी रूप से मजबूत किया जाएगा।
निष्कर्ष
V2V संचार प्रणाली सड़क सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव लाने वाली है। दुनिया के कुछ ही देशों में यह तकनीक लागू है और भारत इसका बड़े पैमाने पर अपनाने वाला प्रमुख देश बनेगा। इससे न केवल दुर्घटनाएं कम होंगी, बल्कि युवा आयु वर्ग (18-34 वर्ष) में होने वाली मौतों पर भी अंकुश लगेगा। सरकार की यह पहल सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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