By: Ravindra Sikarwar
Delhi news: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया। विशेष सीबीआई जज विशाल गोगने ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत 41 आरोपियों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय करने का आदेश दिया।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से यह स्पष्ट है कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्रालय को व्यक्तिगत जागीर की तरह इस्तेमाल किया। परिवार ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम करते हुए सार्वजनिक नौकरियों का दुरुपयोग कर परिवार के नाम पर जमीनें हासिल कीं। कोर्ट ने इसे एक व्यापक साजिश करार दिया, जिसमें सभी आरोपियों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई हैं।
आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के साथ-साथ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) आदि के तहत तय किए गए हैं। बचाव पक्ष की डिस्चार्ज याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर केवल यह देखा जाता है कि मुकदमा चलाने लायक सामग्री है या नहीं, और अभियोजन पक्ष इसमें सफल रहा।
मामले का विवरण
यह घोटाला 2004-2009 की उस अवधि से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों से पटना सहित अन्य जगहों पर जमीनें ली गईं। ये जमीनें बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट के रूप में लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम ट्रांसफर कराई गईं। जांच में यह पैटर्न कई नियुक्तियों में दोहराया गया पाया गया।
सीबीआई ने कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 5 की मौत हो चुकी है। कोर्ट ने 52 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया, जबकि शेष 41 पर आरोप तय किए।
आगे की कार्यवाही
अब मामले में औपचारिक रूप से आरोप 29 जनवरी 2026 को तय किए जाएंगे। इसके बाद गवाहों की पेशी और साक्ष्यों की जांच के साथ नियमित ट्रायल शुरू होगा। आरोपियों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि विपक्ष ने कानून की जीत करार दिया।
यह फैसला बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि तेजस्वी यादव विपक्ष के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।

