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By: Ravindra Sikarwar

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित सैयद फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास मंगलवार देर रात नगर निगम (MCD) द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। आधी रात को हुई इस कार्रवाई के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते प्रशासन व स्थानीय लोगों के बीच टकराव हिंसा में बदल गया। इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि पांच लोगों को हिरासत में लिया गया।

आधी रात में ही क्यों हुई कार्रवाई?

इस सवाल का जवाब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में छिपा है। नवंबर 2025 में हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट के रामलीला मैदान के पास करीब 39,000 वर्ग फुट सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने एमसीडी और पीडब्ल्यूडी को सड़क, फुटपाथ, पार्किंग, बैंक्वेट हॉल, डायग्नोस्टिक सेंटर समेत सभी अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए थे।
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई रात में की गई।

22 दिसंबर को जारी हुआ था नोटिस

एमसीडी के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस में साफ कहा गया था कि मस्जिद के लिए निर्धारित 0.195 एकड़ जमीन से बाहर बने सभी निर्माण अवैध हैं।
नगर निगम का दावा है कि मस्जिद कमेटी या दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से अतिरिक्त जमीन पर वैध कब्जे से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

हाईकोर्ट में 6 जनवरी को हुई सुनवाई

मस्जिद प्रबंधन कमेटी की याचिका पर 6 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने एमसीडी, शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली वक्फ बोर्ड से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
हालांकि, इससे पहले जारी हाईकोर्ट के आदेशों के आधार पर एमसीडी ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रखी।

कड़ी सुरक्षा में चला अभियान

कार्रवाई के दौरान एमसीडी की टीम लगभग 30 बुलडोजर और 50 डंपर ट्रकों के साथ मौके पर पहुंची। पूरे क्षेत्र को 9 जोन में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में अभियान चलाया गया।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की 10 से अधिक कंपनियां और रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया था।

पथराव, आंसू गैस और घायल पुलिसकर्मी

पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 25 से 30 लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान एक डिस्पेंसरी और एक बैंक्वेट हॉल को गिराया गया।
झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने घायल कर्मियों और एमसीडी कर्मचारियों के बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन का पक्ष

एमसीडी का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की गई। प्रशासन का दावा है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा विरोध को हिंसक रूप दे दिया गया।

यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, जबकि इलाके में फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

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