By: Ravindra Sikarwar
Delhi news: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) द्वारा नाबालिगों को जासूसी के लिए इस्तेमाल करने की साजिश का पर्दाफाश किया है। सोशल मीडिया के जरिए भावनात्मक रूप से कमजोर किशोरों को फंसाकर उन्हें संवेदनशील सैन्य जानकारी लीक करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस नेटवर्क में 37 से अधिक नाबालिग जांच के दायरे में हैं।
पठानकोट में 15 साल के लड़के की गिरफ्तारी
पंजाब के पठानकोट में 15 वर्षीय संजीव कुमार नाम के एक किशोर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, वह एक साल से अधिक समय से पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था और भारत की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा था। एसएसपी दलजिंदर सिंह धिल्लों ने बताया कि लड़का सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी एजेंटों के जाल में फंस गया। उसे यह झूठा विश्वास दिलाया गया कि उसके पिता की हत्या हो गई है, जिससे वह मानसिक रूप से कमजोर हो गया।
आईएसआई की नाबालिगों को भर्ती करने की रणनीति
आईएसआई अब युवा और प्रभावशाली किशोरों को निशाना बना रही है, क्योंकि उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है। नाबालिगों को असामान्य ऐप्स के जरिए ब्रेनवॉश किया जाता है। उन्हें सैन्य ठिकानों की तस्वीरें खींचने, सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने और आतंकी संगठनों की लॉजिस्टिक्स में मदद करने के निर्देश दिए जाते हैं। जांच में पता चला है कि पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में 14 से 17 साल के बच्चे इस जाल में फंसे हैं।
व्यापक नेटवर्क और अन्य संदिग्ध
कुल 37 नाबालिगों पर नजर रखी जा रही है, जिनमें पंजाब-हरियाणा से 12 और जम्मू-कश्मीर से 25 शामिल हैं। जम्मू के सांबा जिले में एक अन्य किशोर की हिरासत से यह नेटवर्क उजागर हुआ। पुलिस ने पंजाब भर के थानों को अलर्ट जारी किया है और डिजिटल ट्रेल्स की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह आईएसआई की सुनियोजित योजना है, जिसमें भावनात्मक शोषण और आर्थिक प्रलोभन का इस्तेमाल होता है।
सुरक्षा चुनौतियां और अभिभावकों की जिम्मेदारी
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के फोन और सोशल मीडिया उपयोग पर ध्यान दें। जांच जारी है और व्यापक नेटवर्क को तोड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
आगे की जांच और सतर्कता
सुरक्षा बल डिजिटल संचार चैनलों की गहन पड़ताल कर रहे हैं। यह घटना पाकिस्तान की बदलती जासूसी रणनीति को उजागर करती है, जहां पारंपरिक तरीकों की जगह डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, जिससे सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत पड़ रही है।
