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By: Ravindra Sikarwar

New Delhi news: 2020 के दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि पांच अन्य सह-आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी। यह फैसला 5 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर है। यूएपीए (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता दिखने के कारण जमानत नहीं दी गई। इस फैसले ने एक बार फिर दिल्ली दंगों केस को सुर्खियों में ला दिया है, जहां कीवर्ड्स जैसे “उमर खालिद जमानत”, “शरजील इमाम दिल्ली दंगे” और “सुप्रीम कोर्ट यूएपीए केस” ट्रेंड कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का तर्क: क्यों खारिज हुई जमानत?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल थे, ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से उमर खालिद और शरजील इमाम की “केंद्रीय और निर्देशक भूमिका” साबित होती है। कोर्ट ने “भागीदारी के पदानुक्रम” (hierarchy of participation) का हवाला देते हुए कहा कि ये दोनों “मास्टरमाइंड” स्तर पर हैं, जबकि अन्य आरोपी सहायक भूमिका में थे। यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर रोक लगी हुई है, क्योंकि प्रथम दृष्टया आतंकी गतिविधि का मामला बनता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल में देरी को “ट्रंप कार्ड” नहीं माना जा सकता। हालांकि, उमर और शरजील एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने पर दोबारा जमानत मांग सकते हैं। इस फैसले से “दिल्ली दंगे साजिश केस” और “यूएपीए जमानत नियम” जैसे एसईओ टर्म्स पर चर्चा तेज हो गई है।

उमर खालिद की प्रतिक्रिया: ‘अब यही जिंदगी है’

फैसले के बाद उमर खालिद की पार्टनर बानोज्योत्सना लाहिड़ी ने उनकी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर शेयर की। उमर ने कहा, “मैं उन लोगों के लिए सच में खुश हूं जिन्हें जमानत मिली! बहुत राहत मिली।” जब पार्टनर ने कहा कि कल मुलाकात के लिए आएंगी, तो उमर ने जवाब दिया, “गुड गुड, आ जाना। अब यही जिंदगी है।” यह भावुक प्रतिक्रिया वायरल हो गई, जो जेल में लंबे समय से बंद उमर की मानसिक स्थिति को दर्शाती है। उमर सितंबर 2020 से और शरजील जनवरी 2020 से जेल में हैं। पांच साल से अधिक समय बिना ट्रायल के जेल में रहने के बावजूद उमर ने सह-आरोपियों की रिहाई पर खुशी जताई। यह उद्धरण “उमर खालिद अब यही जिंदगी है” जैसे सर्च टर्म्स को पॉपुलर बना रहा है।

अन्य आरोपियों को राहत: किसे मिली जमानत?

कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दे दी। इनकी भूमिका को “सहायक या परिधीय” बताया गया, इसलिए इन पर यूएपीए की सख्त धाराएं पूरी तरह लागू नहीं होतीं। जमानत पर 12 सख्त शर्तें लगाई गई हैं, जैसे गवाहों को प्रभावित न करना और सबूतों से छेड़छाड़ न करना। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को केस जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया। इस विभाजित फैसले ने “दिल्ली दंगे जमानत अपडेट” और “यूएपीए केस सह आरोपी” जैसे कीवर्ड्स पर ध्यान आकर्षित किया है।

व्यापक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं: न्याय व्यवस्था पर सवाल

यह फैसला विवादास्पद रहा है। विपक्षी नेताओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया, जबकि कुछ ने गुरमीत राम रहीम की पैरोल से तुलना की। मानवाधिकार संगठनों ने यूएपीए को “दमनकारी कानून” करार दिया, जो असहमति दबाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। उमर के पिता ने फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” कहा। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और कुछ राजनीतिक दल इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। यह केस सीएए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े दंगों का प्रतीक बन गया है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। एसईओ के लिहाज से, “2020 दिल्ली दंगे लेटेस्ट अपडेट”, “उमर खालिद शरजील इमाम केस” और “सुप्रीम कोर्ट दिल्ली रायट्स फैसला” हाई सर्च वॉल्यूम वाले टॉपिक्स हैं।

निष्कर्ष: न्याय की प्रतीक्षा जारी

यह फैसला न्याय व्यवस्था में यूएपीए के इस्तेमाल और लंबे पूर्व-ट्रायल हिरासत पर बहस छेड़ता है। उमर खालिद की “अब यही जिंदगी है” वाली टिप्पणी दिल छू लेने वाली है, जो लंबी कानूनी लड़ाई की कठिनाई को उजागर करती है। उम्मीद है कि ट्रायल जल्द पूरा हो और सच सामने आए। यदि आप इस केस से जुड़ी अपडेट्स चाहते हैं, तो फॉलो करते रहें।

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