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By: Ravindra Sikarwar

Rohtak news: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल दी गई है। वे हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद हैं, जहां वे अपनी दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। यह जानकारी सूत्रों से जनवरी 2026 में सामने आई। यह पैरोल पिछले साल अगस्त में मिली 40 दिन की पैरोल के कुछ महीनों बाद आई है।

अपराध और सजा का इतिहास

गुरमीत राम रहीम को साल 2017 में विशेष सीबीआई अदालत ने दो अलग-अलग बलात्कार मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी, जो कुल 20 साल की हुई। इसके अलावा, 2019 में उन्हें एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास की सजा मिली थी। यह हत्या 16 साल से अधिक पुरानी थी। इन गंभीर अपराधों के बावजूद, राम रहीम को जेल से बाहर आने के कई मौके मिल चुके हैं।

बार-बार पैरोल और फरलो की सूची

2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से यह उनकी 15वीं अस्थायी रिहाई है। पहले की कुछ प्रमुख रिहाइयां इस प्रकार हैं:

  • अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल।
  • अप्रैल 2025: 21 दिन का फरलो।
  • जनवरी 2025: 30 दिन की पैरोल (दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले)।
  • अक्टूबर 2024: 20 दिन की पैरोल (हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले)।
  • अगस्त 2024: 21 दिन का फरलो।
  • फरवरी 2022: तीन सप्ताह का फरलो (पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले)।

इनमें से कई रिहाइयों का समय चुनावों से ठीक पहले रहा, जिससे राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं। पैरोल के दौरान राम रहीम अक्सर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में डेरे के आश्रम में या सिरसा स्थित मुख्यालय में रहते हैं।

डेरा का प्रभाव और अनुयायी

सिरसा मुख्यालय वाला डेरा सच्चा सौदा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों में लाखों अनुयायियों वाला संगठन है। हरियाणा में सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार जैसे जिलों में इसका मजबूत आधार है। अनुयायियों की बड़ी संख्या के कारण डेरा प्रमुख की रिहाई को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

विवाद और आलोचना

राम रहीम की बार-बार पैरोल मिलने पर सिख संगठनों, जैसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गंभीर अपराधों के दोषी को इतनी आसानी से राहत देना न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाता है। विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता भी इसे विशेष सुविधा मानते हैं। हरियाणा सरकार इसे अच्छे आचरण के आधार पर दी जाने वाली सामान्य पैरोल बताती है, लेकिन समय को लेकर सवाल बने रहते हैं।

यह मामला एक बार फिर न्याय, राजनीति और धार्मिक प्रभाव के जटिल मिश्रण को उजागर करता है। आने वाले दिनों में पैरोल की शर्तें और राम रहीम की गतिविधियां निगरानी में रहेंगी।