By: Ravindra Sikarwar
Bhagirathpura news: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल आपूर्ति से उपजे संकट ने न केवल स्वास्थ्य आपातकाल पैदा किया है, बल्कि स्थानीय भाजपा नेताओं के सार्वजनिक बयानों ने पार्टी के अंदरूनी अनुशासन पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले में मीडिया और जनता के सामने दिए गए कुछ वक्तव्यों से पार्टी संगठन असंतुष्ट दिखाई दे रहा है। परिणामस्वरूप, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली बुलाया गया, जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि ऐसे बयान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
संकट की शुरुआत और बढ़ता प्रभाव
भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा जल लाइन में सीवेज रिसाव के कारण दूषित पानी की सप्लाई हुई, जिससे डायरिया और उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। पाइपलाइन लीकेज और निर्माण संबंधी लापरवाही को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। इस घटना से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या अलग-अलग बताई गई, लेकिन अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार कई परिवारों ने अपने सदस्य खोए।
प्रभावित इलाके में स्वास्थ्य टीमें तैनात की गईं, एम्बुलेंस और मेडिकल कैंप लगाए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी स्थिति की समीक्षा की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, मौतों के आंकड़ों में अंतर और राहत कार्यों की गति पर सवाल उठते रहे।
नेताओं की बयानबाजी से उपजी असहजता
इस संकट के दौरान स्थानीय भाजपा नेताओं के कुछ बयान विवादास्पद रहे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों पर निर्देश न मानने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी स्थिति में काम करना कठिन हो रहा है। उनका यह वक्तव्य मीडिया में प्रमुखता से आया, जिसे पार्टी संगठन ने अनुशासनहीनता माना।
इसी तरह, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र में आने वाले इस इलाके में घटना होने के बावजूद उनके कुछ मीडिया इंटरैक्शन पर भी असंतोष जताया गया। पार्टी का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं और सरकार की छवि प्रभावित कर रहे हैं।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय दिल्ली तलब
संगठन की सख्ती और दिल्ली दौरा
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा इंदौर पहुंचे और पार्टी कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक की। इसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में भागीरथपुरा मामले पर सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई। विशेष रूप से महापौर के ‘अधिकारी नहीं सुनते’ वाले बयान को पार्टी छवि के लिए हानिकारक बताया गया।
दूसरी ओर, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को शनिवार को दिल्ली बुलाया गया, जहां उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मामले पर चर्चा की और स्थिति की जानकारी दी। विजयवर्गीय ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका दिल्ली जाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक बैठक से संबंधित था। इंदौर लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय नेताओं के साथ अलग से बैठक की और आगे अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए।
आगे की चुनौतियां और सबक
यह घटना इंदौर जैसे शहर के लिए बड़ा झटका है, जो लंबे समय से स्वच्छता के मानकों पर सराहना प्राप्त करता रहा है। प्रशासन ने जांच समिति गठित की है और पाइपलाइन सुधार के कार्य तेज कर दिए हैं। साथ ही, पार्टी संगठन ने नेताओं को संवेदनशील मुद्दों पर संयम बरतने की हिदायत दी है ताकि राहत कार्य बिना राजनीतिक विवाद के सुचारू चल सकें।
यह प्रकरण न केवल जल आपूर्ति व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व में संवाद और अनुशासन की जरूरत को भी रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और कार्रवाई से स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल फोकस प्रभावित परिवारों की सहायता और स्वास्थ्य सुधार पर है।
