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By: Ravindra Sikarwar

Bhopal news: भोपाल शहर में लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई मेट्रो सेवा को अब शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दिसंबर 2025 में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के मात्र दो सप्ताह बाद ही यात्रियों की कमी के चलते मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एमपीएमआरसीएल) ने बड़ा फैसला लिया है। अब मेट्रो की शुरुआती समय-सारणी बदल दी गई है और दैनिक ट्रिप की संख्या भी कम कर दी गई है। यह बदलाव 5 जनवरी 2026 से लागू होगा, जिससे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ेगा।

शुरुआती उत्साह और फिर गिरावट
भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया था। अगले दिन यानी 21 दिसंबर से प्राथमिकता वाले कॉरिडोर (एम्स से सुभाष नगर तक) पर कमर्शियल सेवाएं शुरू हो गईं। पहले दिन लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया और करीब 6,568 यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया। यह संख्या शुरुआती दिनों में दो हजार से अधिक रही, खासकर छुट्टियों जैसे क्रिसमस पर यह 4,000 के पार पहुंच गई।

हालांकि, यह उत्साह ज्यादा दिनों तक नहीं टिका। कुछ ही दिनों में यात्री संख्या तेजी से गिरने लगी। अधिकारियों के अनुसार, अब रोजाना औसतन केवल 1,000 के करीब यात्री ही मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जो पहले दिन की तुलना में एक चौथाई से भी कम है। कुछ दिनों में तो यह आंकड़ा 967 तक पहुंच गया। सुबह के समय तो ट्रिप में मात्र 25-30 यात्री ही सवार हो रहे थे, जिससे संचालन घाटे में चल रहा था।

नई समय-सारणी और ट्रिप में कटौती
यात्रियों की कमी को देखते हुए मेट्रो प्रबंधन ने समय-सारणी में बड़े बदलाव किए हैं। पहले मेट्रो सुबह 9 बजे से शुरू होती थी, लेकिन अब यह तीन घंटे देरी से दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से रवाना होगी। आखिरी ट्रिप शाम साढ़े सात बजे तक चलेगी। ट्रिप की संख्या भी 17 से घटाकर 13 कर दी गई है – एम्स से 7 और सुभाष नगर से 6 ट्रिप। ट्रेनों के बीच अंतराल पहले की तरह 75 मिनट ही रहेगा।

प्रबंधन का कहना है कि यह बदलाव अस्थायी है और यात्रियों की संख्या बढ़ने पर पुरानी व्यवस्था बहाल की जा सकती है। सुबह की ट्रिप इसलिए काटी गईं क्योंकि उस समय यात्रियों की मांग बहुत कम थी, जबकि दोपहर और शाम में थोड़ा बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है।

कम यात्रियों के पीछे संभावित कारण
भोपाल मेट्रो के इस प्राथमिकता कॉरिडोर की लंबाई मात्र 6-7 किलोमीटर है और इसमें 8 स्टेशन हैं। विशेषज्ञों और यात्रियों का मानना है कि छोटा रूट होने से यह दैनिक यात्रियों के लिए ज्यादा उपयोगी नहीं साबित हो रहा। कई लोग इसे केवल ‘देखने की चीज’ मानकर एक बार सफर कर रहे हैं, लेकिन नियमित उपयोग नहीं कर रहे।

इसके अलावा, स्टेशनों पर पहुंचने की सुविधाएं पूरी नहीं हैं – पार्किंग की कमी, लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अभाव और निर्माण कार्य अभी भी जारी होने से यात्रियों को असुविधा हो रही है। शहर की सिटी बसें और ऑटो-रिक्शा पहले से ही सस्ते और पहुंच योग्य विकल्प हैं, जिससे मेट्रो को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि किराया संरचना और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, हालांकि मेट्रो आधुनिक सुविधाओं जैसे एयर कंडीशनिंग, सीसीटीवी और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स से लैस है।

भविष्य की उम्मीदें
भोपाल मेट्रो का पूरा नेटवर्क विस्तार होने पर स्थिति बेहतर हो सकती है। फिलहाल यह केवल एक छोटा हिस्सा है, लेकिन आगे लाइनों का विस्तार होने से व्यस्त इलाकों जैसे एमपी नगर, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और अन्य क्षेत्र जुड़ेंगे। इससे ट्रैफिक जाम कम होने और पर्यावरण अनुकूल यात्रा बढ़ने की उम्मीद है। प्रबंधन यात्रियों से अपील कर रहा है कि वे मेट्रो का अधिक उपयोग करें ताकि सेवाएं बढ़ाई जा सकें।

भोपाल अब उन शहरों की सूची में शामिल हो गया है जहां मेट्रो चल रही है, लेकिन सफलता के लिए यात्रियों का निरंतर समर्थन जरूरी है। आने वाले महीनों में नेटवर्क का विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी से यह सार्वजनिक परिवहन का मजबूत विकल्प बन सकती है।