By: Ravindra Sikarwar
Delhi news: भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित पहली पर्वतीय सुरंग (माउंटेन टनल 5) का निर्माण पूरा हो गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि यह सुरंग परियोजना के लिए एक बड़ा कदम है। इस सफलता से पूरे कॉरिडोर के समयबद्ध पूरा होने की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
परियोजना का कुल स्वरूप और सुरंगों का विवरण
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है, जिसमें से करीब 27.4 किलोमीटर हिस्सा विभिन्न सुरंगों से गुजरेगा। इनमें लगभग 21 किलोमीटर भूमिगत सुरंगें और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें शामिल हैं। कुल मिलाकर परियोजना में 8 पर्वतीय सुरंगें बनाई जा रही हैं – महाराष्ट्र में 7 (कुल लंबाई 6.05 किलोमीटर) और गुजरात में एक (350 मीटर)। इसके अलावा एक अंडरसी टनल भी शामिल है।
पालघर की यह माउंटेन टनल 5 सबसे लंबी और पहली पूरी हुई पर्वतीय सुरंग है, जिसकी लंबाई 1.48 किलोमीटर है (हुड और पोर्टल को छोड़कर 1.39 किलोमीटर)। इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के बीच करीब 5 किलोमीटर लंबी पहली भूमिगत सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका था।
स्टेशन और डिपो की स्थिति
इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। गुजरात में साबरमती टर्मिनल स्टेशन होगा, जबकि मुंबई में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स टर्मिनल के रूप में काम करेगा। रेल मंत्री ने बताया कि सामान्य तौर पर इतनी दूरी के कॉरिडोर के लिए दो डिपो पर्याप्त होते हैं, लेकिन महाराष्ट्र की पिछली सरकार के समय मंजूरियों में देरी के कारण तीन डिपो बनाए जा रहे हैं। प्रमुख शहर जैसे अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार और ठाणे इस रूट से जुड़ेंगे।
हालिया पुल निर्माण की उपलब्धि
पिछले महीने गुजरात के भरूच जिले में एक और महत्वपूर्ण काम पूरा हुआ। कांठारिया गांव के पास नेशनल हाईवे 64 और भरूच-दहेज फ्रेट रेल लाइन के ऊपर 230 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण किया गया। इसमें 130 मीटर का एक स्पैन 9 दिसंबर 2025 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह स्पैन करीब 18 मीटर ऊंचा, 14.9 मीटर चौड़ा और वजन में लगभग 2,780 मीट्रिक टन है।
भुज में फैब्रिकेटेड इस पुल को 100 साल की आयु के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें 1,22,146 से ज्यादा हाई-स्ट्रेंथ टॉर शियर बोल्ट, सी5 सिस्टम पेंटिंग और मेटालिक बेयरिंग का इस्तेमाल हुआ है। पुल लॉन्चिंग का काम मात्र 12 घंटे में पूरा किया गया, जिसमें एनएच-64 पर ट्रैफिक डायवर्जन और रेल लाइन पर अंतराल ब्लॉक लेकर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। इससे सड़क और रेल यातायात में न्यूनतम व्यवधान हुआ।
उन्नत निर्माण तकनीक और प्रगति
पूरी परियोजना अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित है। कॉरिडोर का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा यानी 465 किलोमीटर ऊंचे वायाडक्ट पर बनाया जा रहा है, ताकि भूमि अधिग्रहण कम हो और सुरक्षा बढ़े। अब तक 326 किलोमीटर वायाडक्ट का काम पूरा हो चुका है। योजना के अनुसार 25 नदी पुलों में से 17 बनकर तैयार हैं।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में गुजरात और दादरा-नगर हवेली में 352 किलोमीटर तथा महाराष्ट्र में 156 किलोमीटर रूट शामिल है। परियोजना में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग हो रहा है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
आर्थिक और सामाजिक लाभ
एक बार चालू होने पर यह बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद की दूरी मात्र दो घंटे में पूरी करेगी। इससे व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। दोनों राज्यों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना न केवल यात्रा समय बचाएगी बल्कि लंबे समय तक क्षेत्रीय विकास की धुरी बनेगी।
रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि परियोजना तेज गति से आगे बढ़ रही है और सभी चुनौतियों के बावजूद समय पर पूरी करने का लक्ष्य है। पालघर की इस सुरंग की सफलता ने सभी हितधारकों का उत्साह बढ़ा दिया है। आने वाले महीनों में और कई मील के पत्थर हासिल होने की उम्मीद है।
यह परियोजना भारत को हाई-स्पीड रेल के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
