By: Ravindra Sikarwar
MP news: खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे एक दुखद घटना सामने आई है, जहां पिछले चार दिनों में 200 से ज्यादा तोतों की लाशें मिली हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मौतों का मुख्य कारण खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) है। शुरुआती जांच में बर्ड फ्लू की आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। यह घटना बड़वाह क्षेत्र में नर्मदा पर बने एक्वाडक्ट पुल के आसपास हुई, जहां बड़ी संख्या में तोते झुंड बनाकर आते हैं। इस हादसे ने स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता की लहर दौड़ा दी है।
#### मौतों का विवरण और शुरुआती खोज
यह मामला 29 दिसंबर 2025 से सामने आना शुरू हुआ, जब नवघाट खेड़ी के पास एक्वाडक्ट पुल के नीचे दर्जनों तोतों के शव मिले। जिला वन्यजीव प्रभारी टोनी शर्मा ने बताया कि पहले दिन करीब 25 तोतों की मौत की सूचना मिली थी, लेकिन अगले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़कर 200 से ऊपर पहुंच गई। कुछ रिपोर्ट्स में कबूतर, डायमंड डव और गौरैया जैसे अन्य पक्षियों की भी मौत का जिक्र है, जिससे कुल मृत पक्षियों की संख्या और बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों ने जब बड़ी संख्या में तोते जमीन पर पड़े देखे तो उन्होंने तुरंत वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को सूचित किया। टीमों ने मौके पर पहुंचकर शवों को एकत्रित किया और कुछ जीवित तोतों को बचाने की कोशिश की, लेकिन विषाक्तता इतनी गंभीर थी कि वे भी जल्दी दम तोड़ गए।
#### पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कारण
पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने कई तोतों का पोस्टमार्टम किया। पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने बताया कि मृत पक्षियों के पेट में चावल के दाने, छोटे-छोटे पत्थर और पाचन तंत्र में गंभीर संक्रमण के लक्षण मिले। इससे साफ है कि मौत का कारण खाद्य विषाक्तता है। बर्ड फ्लू या कोई संक्रामक रोग नहीं पाया गया।
वेटरनरी एक्सटेंशन ऑफिसर डॉ. सुरेश बघेल के अनुसार, तोते आसपास के खेतों में कीटनाशक छिड़के गए अनाज खाने के कारण भी प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा नर्मदा नदी का दूषित पानी और पुल पर आने वाले पर्यटकों द्वारा दिए गए अनुचित भोजन ने स्थिति को और खराब किया। लोग अक्सर अच्छी नीयत से पके हुए चावल, बचा हुआ खाना या मसालेदार चीजें पक्षियों को डाल देते हैं, जो उनके नाजुक पाचन तंत्र के लिए जहर समान साबित होता है।
विसरा सैंपल को आगे की जांच के लिए जबलपुर और भोपाल की लैबोरेटरी में भेजा गया है, ताकि विषाक्तता के सटीक स्रोत का पता लगाया जा सके।
#### प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिबंध
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक्वाडक्ट पुल के आसपास पक्षियों को खिलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं। कलेक्टर के निर्देश पर उपसंचालक जीएस सोलंकी ने मौके का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की।
वन्यजीव प्रेमी टोनी शर्मा ने लोगों से अपील की है कि पक्षियों को केवल कच्चे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा या गेहूं ही खिलाएं। पका हुआ या बचा हुआ भोजन उनके लिए घातक हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में अनजाने में की गई मदद भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
#### पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर प्रभाव
यह घटना एक बार फिर मानवीय हस्तक्षेप के खतरों को उजागर करती है। नर्मदा तट पर तोतों का बड़ा झुंड प्राकृतिक रूप से अनाज और फलों पर निर्भर रहता है, लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या और अनियंत्रित खिलाने की आदत ने पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित कर दिया है। कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग भी पक्षियों के लिए खतरा बन रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। नदी किनारे साइनबोर्ड लगाए जाएं, जहां स्पष्ट लिखा हो कि क्या खिलाना सुरक्षित है और क्या नहीं। साथ ही, खेतों में कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग पर किसानों को प्रशिक्षित किया जाए।
यह दुखद घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। अच्छी नीयत से किया गया कार्य भी कभी-कभी अनजाने में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उम्मीद है कि प्रशासन की सख्ती और लोगों की जागरूकता से भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी, और नर्मदा तट फिर से तोतों की चहचहाहट से गूंज उठेगा।
