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By: Ravindra Sikarwar

MP news: ग्वालियर शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित किए गए खेल मैदानों में से एक प्रमुख छत्री मंडी खेल मैदान आज बदहाली का शिकार हो चुका है। युवाओं को खेल के माध्यम से बेहतर भविष्य प्रदान करने और शहर में खेल भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह मैदान अब असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है। शाम ढलते ही यहां नशे की महफिलें सजती हैं, जुआ चलता है और अवांछित गतिविधियां जोर पकड़ती हैं, जिससे खिलाड़ी और उनके परिवार चिंतित हैं।

पहले यह मैदान शहर के खेल प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान था। ग्वालियर को हॉकी का गढ़ माना जाता है और छत्री मंडी मैदान को हॉकी खिलाड़ियों की पाठशाला कहा जाता था। रोजाना सैकड़ों जूनियर और सीनियर स्तर के एथलीट यहां प्रैक्टिस करते थे। मैदान की विशालता के चलते विभिन्न आयु वर्ग के लोग यहां फिटनेस और खेल ACTIVITIES में हिस्सा लेते थे। स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत यहां आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गईं। हॉकी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, कबड्डी और बास्केटबॉल के लिए अलग-अलग कोर्ट बनाए गए। जॉगिंग के लिए ट्रैक तैयार किया गया, साथ ही शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था के रूप में वाटर कूलर भी स्थापित किए गए। इन सुविधाओं से उम्मीद जगी थी कि शहर के युवा खेलों में आगे बढ़ेंगे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएंगे।

लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह उलट है। रखरखाव की कमी ने सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया है। स्थानीय निवासियों और खिलाड़ियों की शिकायत है कि जैसे ही शाम होती है, मैदान पर असामाजिक लोगों का कब्जा हो जाता है। खुले में शराब पीना, गांजा जैसी नशीली चीजों का सेवन और जुए के खेल आम बात हो गए हैं। ओपन जिम क्षेत्र में बिखरी हुई अव्यवस्था और पार्किंग स्थल पर जुआ खेलते लोगों के समूह देखे जा सकते हैं। छोटे बच्चों और युवा खिलाड़ियों को अक्सर डर के मारे अभ्यास अधूरा छोड़कर घर लौटना पड़ता है। अभिभावक अब अपने बच्चों को अकेले मैदान पर भेजने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि सुरक्षा का कोई भरोसा नहीं रह गया है।

सुविधाओं की हालत भी दयनीय है। मैदान में बने शौचालय गंदगी और दुर्गंध से भरे हैं, जिनका उपयोग करना मुश्किल है। कई जगह फिटिंग्स टूटी हुई हैं। वाटर कूलर महीनों से खराब पड़ा है, जिससे खिलाड़ियों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। पहले रात के समय सुरक्षा गार्ड तैनात रहते थे, लेकिन अब अंधेरा होते ही मैदान असुरक्षित हो जाता है। गारंटी अवधि समाप्त होने के बाद स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नगर निगम दोनों ही जिम्मेदारी से पीछे हट गए हैं। रखरखाव पूरी तरह ठप्प हो चुका है, जो स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े वादों पर सवालिया निशान लगाता है।

यह मुद्दा नगर निगम की बैठक में भी जोरदार तरीके से उठाया गया। क्षेत्रीय पार्षद मोहित जाट ने प्रशासन की लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जहां बच्चों और युवाओं का करियर संवरना चाहिए, वहां नशा और जुआ जैसी गतिविधियां फल-फूल रही हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि प्रशासन की उदासीनता के कारण असामाजिक तत्व बेखौफ हो गए हैं।

हाल ही में मैदान के निकट स्थित रोकड़िया सरकार हनुमान मंदिर में चोरी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। संदेह है कि रात में नशे की हालत में घूमने वाले लोग ही इस वारदात के जिम्मेदार हो सकते हैं। हालांकि पुलिस जांच अभी जारी है और कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिकारी धर्मवीर सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि सूचना मिलने पर असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि केवल आश्वासन काफी नहीं, नियमित गश्त और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।

यह स्थिति न केवल छत्री मंडी मैदान की है, बल्कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के रखरखाव और दीर्घकालिक प्रबंधन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो युवाओं का खेल के प्रति उत्साह खत्म हो जाएगा और शहर की खेल विरासत को गहरा नुकसान पहुंचेगा। प्रशासन को चाहिए कि तुरंत कदम उठाए, सुरक्षा बढ़ाए और सुविधाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करे, ताकि स्मार्ट सिटी का सपना सचमुच स्मार्ट बने।