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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश का इंदौर शहर लगातार आठ वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आ रहा है, लेकिन दिसंबर 2025 के अंत में शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की सप्लाई ने इस छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नर्मदा नदी से आने वाले पानी में सीवरेज का मिश्रण होने से सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिनमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। इस घटना में अब तक कई मौतें हो चुकी हैं, जबकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है।

यह संकट 24 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ, जब भागीरथपुरा के निवासियों ने नलों से आने वाले पानी में अजीब गंध और स्वाद की शिकायत की। शुरुआत में कुछ लोग बीमार पड़े, लेकिन जल्द ही संख्या बढ़कर सैकड़ों में पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के अनुसार, इलाके के हजारों घरों की जांच में 1,000 से अधिक लोग प्रभावित पाए गए, जिनमें से कई को हल्के लक्षण थे और उन्हें मौके पर ही दवा दी गई। गंभीर मामलों में 100 से ज्यादा मरीज विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराए गए। कई मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, लेकिन कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।

मौतों के आंकड़े को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति है। आधिकारिक रूप से प्रशासन ने तीन मौतों की पुष्टि की है, जिनमें एक बुजुर्ग और दो महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौतों की संख्या 5 से 8 तक पहुंच चुकी है। मृतकों में नंदलाल पाल (75 वर्ष), उर्मिला यादव (69), उमा कोरी (31), मंजुला दिगंबर (74) जैसे नाम शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि ये सभी दूषित पानी पीने से बीमार हुए और इलाज के दौरान जान गंवाई। कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया, लेकिन परिवार वाले इसे पानी की गंदगी से जोड़ते हैं।

जांच में सामने आया कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने सार्वजनिक शौचालय के ठीक नीचे नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था। इससे ड्रेनेज का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा था। इलाके में चल रही खुदाई कार्यों के दौरान भी ड्रेनेज लाइन क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है। नगर निगम की टीम ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं, और सप्लाई को तुरंत रोककर टैंकरों से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। प्रभावित परिवारों को मेडिकल किट और क्लोरिन युक्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। सभी मरीजों का मुफ्त और उचित इलाज सुनिश्चित करने के साथ-साथ मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। नगर निगम ने लापरवाही के लिए तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की – दो को निलंबित किया गया और एक सब-इंजीनियर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जिनका विधानसभा क्षेत्र यह इलाका है, ने अस्पतालों का दौरा कर मरीजों का हाल जाना और अधिकारियों को सख्त हिदायत दी।

विपक्ष ने इस घटना को नगर निगम की घोर लापरवाही करार दिया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किए और मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। कुछ कार्यकर्ताओं ने गंदे पानी की बोतलें लेकर विरोध जताया। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्थानीय निवासी लंबे समय से पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।

यह घटना इंदौर जैसे स्वच्छता के मॉडल शहर के लिए एक बड़ा सबक है। पेयजल की गुणवत्ता और पाइपलाइन रखरखाव पर सख्त निगरानी की जरूरत स्पष्ट हो गई है। प्रशासन अब पूरे शहर में जल सप्लाई की व्यापक जांच कर रहा है ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। प्रभावित इलाके में स्वास्थ्य टीमें लगातार काम कर रही हैं, और स्थिति अब नियंत्रण में आती दिख रही है। उम्मीद है कि जल्द सभी मरीज स्वस्थ होंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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