By: Ravindra Sikarwar
बिहार की राजधानी पटना में जल परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। गंगा नदी पर इलेक्ट्रिक बोट से चलने वाली वाटर मेट्रो सेवा जनवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। यह सेवा न केवल शहर के लोगों को सड़क जाम से राहत देगी, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल विकल्प साबित होगी। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के सहयोग से यह परियोजना पटना को आधुनिक शहरी परिवहन का नया मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेवा की शुरुआत और तैयारी
वाटर मेट्रो सेवा की शुरुआत के लिए सभी जरूरी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस सेवा का मुख्य जहाज एमवी गोमधार कुंवर नाम की इलेक्ट्रिक बोट है, जिसे हुगली कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया है। यह बोट पूरी तरह से बैटरी से चलने वाली है और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। आईडब्ल्यूएआई पटना के अधिकारियों के अनुसार, बोट के सभी तकनीकी परीक्षण और नदी पर ट्रायल रन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। अब केवल अंतिम प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया बाकी है, जिसके बाद जनवरी 2026 में सेवा का औपचारिक शुभारंभ हो सकता है। पहले यह सेवा दशहरा या त्योहारों के मौसम में शुरू होने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इसे आगे बढ़ाया गया।
रूट और सुविधाएं
यह वाटर मेट्रो सेवा मुख्य रूप से दीघा घाट से शुरू होकर एनआईटी घाट और फिर कंगन घाट तक जाएगी। वापसी की यात्रा में भी यही रूट अपनाया जाएगा। इन घाटों पर विशेष तैरते हुए जेट्टी और चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को उतरने-चढ़ने में आसानी हो। बोट की बैटरी मात्र 30 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और एक बार फुल चार्ज होने पर यह करीब 90 मिनट तक लगातार चल सकती है।


बोट पूरी तरह वातानुकूलित है, जिसमें 50 यात्रियों के लिए आरामदायक सीटें हैं। इसके अलावा, 25 लोग खड़े होकर भी सफर कर सकते हैं। बड़ी खिड़कियों और आधुनिक डिजाइन के कारण यात्रियों को गंगा के मनोरम दृश्यों का पूरा आनंद मिलेगा। सुरक्षा के लिहाज से भी सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं, जैसे सीसीटीवी, आपातकालीन व्यवस्था और जीवन रक्षक उपकरण।
पर्यटन और परिवहन पर प्रभाव
पटना जैसे व्यस्त शहर में सड़कें अक्सर जाम से भरी रहती हैं। वाटर मेट्रो सेवा से न केवल दैनिक यात्रियों को तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, बल्कि यह शहर के पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगी। गंगा के किनारे के खूबसूरत नजारे, शांत वातावरण और नदी की लहरों पर सफर का अनुभव पर्यटकों को बेहद पसंद आएगा। यह सेवा कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर तैयार की गई है, जो पहले से ही सफलतापूर्वक चल रही है। पटना में यह सेवा शुरू होने से बिहार का जल पर्यटन मजबूत होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक बोट होने से प्रदूषण में कमी आएगी, जो शहर की हवा और नदी दोनों के लिए फायदेमंद है। भविष्य में इस सेवा को और विस्तार देने की योजना है, जिसमें अधिक रूट और अतिरिक्त बोटें शामिल की जा सकती हैं।
एक नई शुरुआत
गंगा पर वाटर मेट्रो सेवा पटना के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल परिवहन की समस्या का समाधान करेगी, बल्कि शहर को पर्यावरण अनुकूल और स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ाएगी। नए साल की शुरुआत के साथ यह सेवा पटना वासियों और आने वाले पर्यटकों के लिए एक यादगार तोहफा साबित होगी। आईडब्ल्यूएआई और बिहार सरकार की यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बनेगी, जहां जलमार्गों का उपयोग शहरी परिवहन के लिए किया जा सकता है।
