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By: Ravindra Sikarwar

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध घुसपैठ की आशंकाओं के बीच पुलिस ने एक व्यापक और आक्रामक कार्रवाई शुरू की है। यह अभियान शहर की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। पुलिस की इस मुहिम ने न केवल स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को भी फिर से चर्चा में ला दिया है।

सरप्राइज चेकिंग से शुरू हुआ ऑपरेशन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह के सीधे निर्देशन में शुरू की गई। सुबह करीब चार बजे शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ पुलिस टीमों ने छापेमारी की। मुख्य रूप से मोवा, टिकरापारा, खमतराई, उरला और सिविल लाइन जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया, जहां बाहर से आए लोग बड़ी संख्या में रहते हैं।

सीएसपी स्तर के अधिकारियों की देखरेख में बीटवार तरीके से संदिग्ध स्थानों पर दबिश दी गई। इस दौरान अन्य राज्यों से आकर रायपुर में बसने वाले करीब 1000 से ज्यादा व्यक्तियों की पहचान की गई और उनके दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की गई। शुरुआती जांच में सौ से अधिक लोग संदिग्ध श्रेणी में आए, जिनके पास वैध पहचान पत्र या अन्य जरूरी कागजात नहीं मिले। ये लोग खुद को मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल या बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्रों का निवासी बता रहे थे, लेकिन उनकी बातों में विरोधाभास पाया गया।

संदिग्धों की गतिविधियां और पृष्ठभूमि
जांच में सामने आया कि अधिकांश संदिग्ध व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरी, निर्माण कार्य या ऑटो रिक्शा चलाने जैसे कामों में लगे हुए हैं। ये लोग शहर के घनी आबादी वाले और कम सुविधा वाले इलाकों में किराए के मकानों या झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे थे। पूछताछ के दौरान कई लोग यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि वे रायपुर कब और किस माध्यम से पहुंचे। ज्यादातर ने बताया कि वे पिछले एक-दो वर्षों में यहां आए हैं, लेकिन पहले कहां थे या उनके मूल दस्तावेज कहां हैं, इस पर संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।

पुलिस का मानना है कि ऐसे लोग अवैध रूप से सीमा पार करके भारत में प्रवेश कर सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में संगठित नेटवर्क की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

तकनीकी जांच और आगे की कार्रवाई
अभियान को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल फोन की गहन जांच शुरू कर दी है। कॉल डिटेल्स, नेटवर्क लोकेशन और संपर्क सूची का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके तार किन लोगों या समूहों से जुड़े हैं। सभी संदिग्धों को पुलिस लाइन में लाकर उनके कागजातों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निर्वासन या अन्य दंड शामिल हो सकते हैं।

पहले भी हुई थी इसी तरह की मुहिम
यह कोई पहली घटना नहीं है। लगभग ग्यारह महीने पहले रायपुर पुलिस ने इसी प्रकार का विशेष अभियान चलाया था, जिसमें 224 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उस समय भी घुसपैठ की आशंकाओं के आधार पर बड़े पैमाने पर छानबीन हुई थी। अब एक बार फिर इस मुहिम ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय निवासी इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, क्योंकि इससे अपराध और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लग सकता है।

सुरक्षा के व्यापक प्रभाव
यह अभियान केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य और देश में अवैध घुसपैठ के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास जनसंख्या संतुलन, रोजगार अवसरों और आंतरिक सुरक्षा पर सकारात्मक असर डालेंगे। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी हो, तो तुरंत सूचित करें। इससे शहर को और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रशासन अब घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में जांच के परिणामों से कई बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो न केवल रायपुर बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे।

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