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By: Ravindra Sikarwar

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने बड़ा निर्णय लेते हुए 28 और 29 जनवरी को प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इस फैसले के तहत न केवल टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) बल्कि पीजीटी और टीजीटी भर्ती परीक्षाएं भी निरस्त कर दी गई हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन परीक्षाओं के लिए नई तारीखें जल्द जारी की जाएंगी

आयोग की पहली बैठक में लिए गए अहम फैसले
यह निर्णय आयोग की हाल ही में आयोजित बैठक में लिया गया। खास बात यह रही कि यह बैठक आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष, पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशांत की अध्यक्षता में पहली आधिकारिक बैठक थी। बैठक के दौरान परीक्षा नियंत्रक (एग्जाम कंट्रोलर) को निर्देश दिए गए कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं की दोबारा समीक्षा की जाए और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुव्यवस्थित किया जाए।

आयोग का मानना है कि बिना पूरी तैयारी के परीक्षा कराने से अव्यवस्थाएं पैदा हो सकती हैं, इसलिए समय लेकर पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाना अधिक जरूरी है।

जनवरी में प्रस्तावित परीक्षाएं अब नहीं होंगी
इस फैसले के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि जनवरी को आयोजित होने वाली परीक्षाएं अब नहीं कराई जाएंगी। पहले से जारी कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया है और अभ्यर्थियों को नई तारीखों के लिए इंतजार करना होगा। आयोग ने संकेत दिए हैं कि संशोधित कार्यक्रम को जल्द सार्वजनिक किया जाएगा ताकि छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

वार्षिक परीक्षा कैलेंडर होगा लागू
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जो भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। आयोग ने तय किया है कि अब भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इसी कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य यह है कि अभ्यर्थियों को बार-बार तारीखों में बदलाव की समस्या से न जूझना पड़े और परीक्षा प्रक्रिया में स्थिरता बनी रहे।

करीब 15 लाख अभ्यर्थी होंगे प्रभावित
टीईटी और पीजीटी-टीजीटी परीक्षाएं रद्द होने से करीब 15 लाख अभ्यर्थी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। हालांकि, आयोग का कहना है कि यह फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। जल्दबाजी में परीक्षा कराने के बजाय बेहतर प्रबंधन और साफ-सुथरी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।

आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद से बचने के लिए यह कदम जरूरी था।

पारदर्शिता के लिए इंटरनल विजिलेंस सिस्टम
बैठक में यह भी तय किया गया कि आयोग के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इंटरनल विजिलेंस सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इससे परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और भर्ती प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा सकेगी। आयोग का मानना है कि इससे निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और अभ्यर्थियों का भरोसा भी बढ़ेगा।

क्या है यूपी टीईटी परीक्षा
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा, जिसे संक्षेप में यूपी टीईटी कहा जाता है, राज्य में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य परीक्षा है। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की पात्रता तय करने के लिए आयोजित की जाती है। यूपी टीईटी का आयोजन उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है।

इस परीक्षा में दो पेपर होते हैं—

  • पेपर-1: प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5)
  • पेपर-2: उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8)

टीईटी पास करना शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का पहला और जरूरी चरण माना जाता है।

आगे क्या करें अभ्यर्थी
आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। नई परीक्षा तिथियों और कार्यक्रम की जानकारी जल्द ही आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

यूपी टीईटी, पीजीटी और टीजीटी परीक्षाओं का निरस्त होना भले ही छात्रों के लिए अस्थायी निराशा लेकर आया हो, लेकिन आयोग का दावा है कि यह कदम बेहतर, पारदर्शी और व्यवस्थित परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अब सभी की निगाहें नई तारीखों की घोषणा पर टिकी हैं।

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