By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरे इलाके को हैरानी में डाल दिया है। जिस युवक को मृत मानकर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया, उसके तीन दोस्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और परिजनों ने अंतिम संस्कार तक कर दिया—वही युवक 61 दिन बाद जिंदा अपने घर लौट आया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया, सबूतों की विश्वसनीयता और पहचान की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
अधजली लाश से शुरू हुई कहानी
करीब दो महीने पहले जशपुर जिले में एक अधजली हुई लाश बरामद की गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने लाश की पहचान सीमित खाखा नामक युवक के रूप में की। परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। परिजनों ने पुलिस की पहचान पर भरोसा करते हुए युवक का अंतिम संस्कार भी कर दिया। इसके साथ ही परिवार ने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो देने का गम मान लिया।
हत्या के आरोप में तीन दोस्त गिरफ्तार
मामले की आगे जांच करते हुए पुलिस ने मृतक बताए जा रहे युवक के तीन दोस्तों को हिरासत में लिया। पुलिस का दावा था कि कमीशन के पैसों को लेकर आपसी विवाद हुआ, जो बाद में हत्या में बदल गया। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है। इसके बाद हत्या का मामला सुलझा हुआ मान लिया गया और तीनों युवक जेल भेज दिए गए।
शनिवार की रात आया चौंकाने वाला मोड़
इस पूरे घटनाक्रम में अप्रत्याशित मोड़ उस वक्त आया, जब शनिवार की रात सीमित खाखा खुद अपने गांव सिटोंगा पहुंच गया। उसे देखते ही परिजन सन्न रह गए। पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि जिसे मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह उनके सामने खड़ा है। कुछ देर बाद जब सच्चाई सामने आई, तो परिवार का मातम खुशी में बदल गया।
सरपंच के साथ थाने पहुंचा युवक
घटना की गंभीरता को समझते हुए गांव की सरपंच कल्पना खलखो सीमित खाखा को लेकर सिटी कोतवाली पहुंचीं। वहां सीमित ने पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया और बताया कि वह पूरी तरह जिंदा है और उसके दोस्तों ने उसकी हत्या नहीं की। उसने साफ कहा कि जिन तीन युवकों को जेल भेजा गया है, वे निर्दोष हैं।
नौकरी की तलाश में गया था झारखंड
सीमित खाखा ने पुलिस को बताया कि वह रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। रांची पहुंचने के बाद वह अपने साथियों से बिछड़ गया और बाद में गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव में मजदूरी करने लगा। उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, जिस वजह से वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर सका। इसी दौरान जशपुर में मिली लाश को उसकी मान लिया गया और पूरा मामला हत्या में बदल गया।
पुलिस की बढ़ी मुश्किलें
जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि मृतक बताए जा रहे युवक जिंदा है, पुलिस के सामने गंभीर स्थिति पैदा हो गई। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधजली लाश आखिर किसकी थी, जिसकी पहचान गलत तरीके से की गई। इस चूक के कारण तीन निर्दोष युवक करीब दो महीने तक जेल में रहे।
विशेष जांच टीम गठित
जशपुर के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि शव की वास्तविक पहचान और पूरे घटनाक्रम की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। उन्होंने कहा कि पहले जो साक्ष्य उपलब्ध थे, उनके आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब नए तथ्यों के सामने आने के बाद जांच नए सिरे से होगी।
निर्दोषों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू
एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीनों युवकों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जांच में जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी बन सकती है। जहां एक परिवार ने अपने बेटे को खोने का दुख झेला, वहीं तीन निर्दोष युवकों को जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस मामले में पारदर्शी जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय करती है या नहीं।
