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By: Ravindra Sikarwar

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। मैनपुर थाना क्षेत्र के दडईपानी गांव के पास पहाड़ी जंगलों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए बड़े हथियार और विस्फोटक सामग्री के जखीरे को बरामद कर नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई 21 दिसंबर 2025 को हुई, जिसमें नक्सलियों की उस बड़ी योजना को विफल कर दिया गया, जिसमें वे आईईडी और मोर्टार के जरिए जवानों पर घात लगाकर हमला करने वाले थे। इस सफलता से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को नई ताकत मिली है, जहां एक ओर नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सुरक्षा बलों के ऑपरेशन से उनका मनोबल टूटता जा रहा है।

यह अभियान छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से सटे माओवादी प्रभावित इलाके में चलाया गया। खुफिया सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित माओवादी संगठन की डीजीएन डिवीजन के सदस्यों ने पुलिस और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए पहाड़ियों में विस्फोटक और हथियार छिपाए हैं। सूचना के आधार पर सीआरपीएफ, गरियाबंद की विशेष ई-30 यूनिट, एसटीएफ, 207 कोबरा बटालियन और अन्य टीमों की संयुक्त पार्टी ने 19 दिसंबर से क्षेत्र में सघन तलाशी शुरू की। पहाड़ी की तलहटी में चट्टानों के बीच प्लास्टिक के ड्रम और स्टील के कंटेनरों में छिपाई गई सामग्री को जवानों ने खोज निकाला।

बरामद सामग्री में एक कंपनी निर्मित मोर्टार, 22 मोर्टार शेल, एक भरमार बंदूक, 150 डेटोनेटर, 18 तीर बम और आईईडी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य विस्फोटक सामग्रियां शामिल हैं। ये सभी चीजें नक्सलियों की उस साजिश का हिस्सा थीं, जिसमें वे सुरक्षाबलों की गश्ती टीमों पर अचानक हमला कर बड़ा नुकसान पहुंचाना चाहते थे। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डीजीएन डिवीजन के नक्सली लंबे समय से इस इलाके में सक्रिय थे और बॉर्डर का फायदा उठाकर ओडिशा की ओर भी अपनी गतिविधियां फैला रहे थे। जवानों की त्वरित कार्रवाई से उनकी यह योजना पूरी तरह ध्वस्त हो गई।

सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए बरामद विस्फोटकों को मौके पर ही नियंत्रित तरीके से निष्क्रिय किया जा रहा है, ताकि किसी तरह का खतरा न रहे। अभियान में शामिल अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी सर्चिंग जारी है, क्योंकि संभावना है कि नक्सलियों ने अन्य जगहों पर भी ऐसे डंप बनाए हों। इस इलाके की दुर्गम पहाड़ियां और घने जंगल नक्सलियों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह रही हैं, लेकिन अब लगातार हो रहे ऑपरेशन से उनकी सप्लाई लाइन और ठिकाने बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्रीय बलों के संयुक्त प्रयासों से राज्य में नक्सलवाद तेजी से कमजोर पड़ रहा है। इस साल कई बड़ी मुठभेड़ों में दर्जनों नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों ने आत्मसमर्पण किया है। गरियाबंद जैसे बॉर्डर जिलों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यहां से नक्सली पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी अपनी गतिविधियां चलाते हैं। इस सफल अभियान से न केवल जवानों का हौसला बढ़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। ग्रामीण अब खुलकर पुलिस का सहयोग कर रहे हैं और नक्सलियों की सूचनाएं दे रहे हैं।

यह कार्रवाई नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में एक और कदम है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे ऑपरेशन जारी रहने से जल्द ही माओवादी संगठन पूरी तरह कमजोर हो जाएगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। क्षेत्र में शांति बहाली के लिए पुलिस और प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि आम जनता बिना डर के जीवन जी सके। आने वाले दिनों में और ऐसे अभियान होने की उम्मीद है, जो नक्सलवाद की जड़ों को और कमजोर करेंगे।

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