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By: Ravindra Sikarwar

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी को लेकर योगी सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि खेती और किसानों के हितों से जुड़ा कोई भी अपराध किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद माफियाओं के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) जैसी कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि उर्वरकों की कालाबाजारी केवल एक सामान्य आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह प्रदेश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और समूची अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है।

हाल के दिनों में कई जिलों से खाद की कमी, ओवररेटिंग और अवैध जमाखोरी की शिकायतें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को संकट में डालकर मुनाफाखोरी करने वालों के साथ किसी भी तरह की नरमी न बरती जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व केवल कानून का उल्लंघन नहीं कर रहे, बल्कि देश और प्रदेश की खाद्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए इन अपराधियों को सामान्य अपराधी मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी या कालाबाजार का मामला सामने आए, वहां सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर रासुका जैसी कठोर धाराओं का प्रयोग किया जाए, ताकि अन्य लोग भी इससे सबक लें। सरकार का मानना है कि जब तक माफिया तत्वों में कानून का भय नहीं होगा, तब तक किसानों को राहत नहीं मिल सकती।

खाद की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी तंत्र को और सख्त कर दिया है। अब खाद की दुकानों पर नियमित जांच के साथ-साथ औचक निरीक्षण भी तेज कर दिए गए हैं। इन निरीक्षणों के दौरान खाद के स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, दर सूची और वितरण प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाद निर्धारित मूल्य पर ही किसानों को उपलब्ध कराई जाए और किसी भी तरह की अनियमितता न हो।

योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरे सिस्टम में केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे। यदि किसी स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत या आंख मूंदकर अनदेखी करने की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का संदेश साफ है कि जिम्मेदारी से बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।

इसके साथ ही सरकार ने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों पर त्वरित एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अब केवल नोटिस या चेतावनी देकर मामलों को ठंडे बस्ते में डालने की नीति नहीं अपनाई जाएगी। शिकायत मिलते ही कानूनी कार्रवाई शुरू होगी, ताकि दोषियों को तुरंत कानून के दायरे में लाया जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि खाद की समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्धता किसानों के लिए बेहद जरूरी है, खासकर रबी और खरीफ सीजन के दौरान। यदि खाद की आपूर्ति बाधित होती है या कालाबाजारी के कारण किसानों को परेशानी होती है, तो इसका असर सीधे फसल उत्पादन पर पड़ता है। यही वजह है कि सरकार इसे केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास और किसानों की खुशहाली से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रही है।

योगी सरकार के इस सख्त रुख से यह साफ हो गया है कि अब खाद माफियाओं के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को किसी भी कीमत पर शोषण का शिकार न होने दिया जाए और उन्हें समय पर, सही दाम पर खाद उपलब्ध हो। रासुका जैसी सख्त कार्रवाई का संदेश न केवल माफियाओं के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकार किसान हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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