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By: Ravindra Sikarwar

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा और होटल कारोबारी दीपक टंडन के बीच चल रहे कथित लव ट्रैप और आर्थिक लेन-देन से जुड़े हाईप्रोफाइल मामले में अब एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। इस पूरे विवाद में महादेव सट्टा ऐप का नाम सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। दीपक टंडन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को पत्र लिखकर डीएसपी कल्पना वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनसे पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है।

दीपक टंडन द्वारा भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से डीएसपी कल्पना वर्मा के संपर्क में था। टंडन का कहना है कि उसके संबंध न केवल कल्पना वर्मा से, बल्कि उनके पिता हेमंत कुमार वर्मा और भाई राकेश कुमार वर्मा उर्फ बिट्टू से भी पारिवारिक स्तर पर थे। इन्हीं नजदीकियों के बीच कथित तौर पर पैसों का लेन-देन शुरू हुआ, जो आगे चलकर विवाद की वजह बना।

टंडन ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए उसे आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया। उसका दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में उसे करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की क्षति हुई है। उसने यह भी आरोप लगाया कि कल्पना वर्मा ने धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग के जरिए उस पर दबाव बनाया, जिससे उसका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

पत्र में एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि कल्पना वर्मा ने उसे दंतेवाड़ा में महादेव सट्टा ऐप का पैनल ऑपरेट करने के लिए दबाव डाला था। टंडन का कहना है कि उसने इस अवैध गतिविधि में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच संबंध बिगड़ गए और उसी के बाद कथित रूप से उसे पैसों के लेन-देन के मामले में फंसाया गया। टंडन ने यह भी दावा किया है कि एक सरकारी पुलिस अधिकारी होने के बावजूद कल्पना वर्मा अपने स्वयं के बैंक खाते के अलावा अपने परिजनों, खासकर अपने पिता के बैंक खाते में भी नियमित रूप से बड़ी रकम का लेन-देन करती थीं। शिकायत पत्र के साथ कथित भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

वहीं दूसरी ओर, डीएसपी कल्पना वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनका महादेव सट्टा ऐप या किसी भी तरह के सट्टा कारोबार से कोई संबंध नहीं है। डीएसपी का आरोप है कि दीपक टंडन उन पर अदालत में चल रहे मामले को वापस लेने का दबाव बना रहा था। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो बदनाम करने की नीयत से उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए और कथित फर्जी चैट, तस्वीरें व अन्य सामग्री फैलाने की कोशिश की गई।

इस पूरे विवाद के बीच दीपक टंडन का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, टंडन के खिलाफ कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में करीब 27.90 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और इसमें अदालत द्वारा कई बार गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है।

18 दिसंबर को महेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने एसपी कोरबा को पत्र लिखकर एक बार फिर दीपक टंडन की गिरफ्तारी की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि टंडन ने रायपुर, सक्ती और कोरबा समेत अन्य जिलों में भी धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम दिया है और उसके फरार होने की आशंका बनी हुई है। इस शिकायत के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

कुल मिलाकर, डीएसपी कल्पना वर्मा और दीपक टंडन के बीच चल रहा यह विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा है। महादेव सट्टा ऐप जैसे बड़े अवैध नेटवर्क का नाम सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस और जांच एजेंसियां इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कैसे करती हैं और इस हाईप्रोफाइल प्रकरण का सच कब सामने आता है।

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