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By: Ravindra Sikarwar

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा की स्थापना के 69 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण का मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहा। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना को लेकर एक अहम बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि राज्य सरकार की मंशा लाड़ली बहनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को आने वाले समय में और बढ़ाने की है और सरकार का लक्ष्य इसे 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक ले जाने का है।

विशेष सत्र के दौरान विपक्ष ने लाड़ली बहना योजना की मौजूदा राशि को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी दलों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के दौर में महिलाओं को दी जा रही सहायता अपर्याप्त है और इसे कम से कम 3 हजार रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसी चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सरकार की दीर्घकालिक सोच को सदन के सामने रखा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लाड़ली बहना योजना को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है और इसे किसी भी तरह से चुनावी वादे या राजनीतिक हथकंडे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस योजना को लेकर अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार खुद बहनों के हित में लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जहां विपक्ष 3 हजार रुपये की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का लक्ष्य बहनों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह देने का है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाने की प्रक्रिया पहले से ही चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार ने समय-समय पर सहायता राशि में इजाफा किया है और आने वाले समय में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसे आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा।

डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में नारी सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि उनकी सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल भाषणों या घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। लाड़ली बहना योजना भी इसी सोच का हिस्सा है, जिसके जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष अक्सर महिलाओं के नाम पर राजनीति करता है, लेकिन सरकार ने सत्ता में आने के बाद योजनाओं को वास्तविक रूप दिया है। उन्होंने कहा कि बहनों के खाते में नियमित रूप से सहायता राशि भेजी जा रही है और भविष्य में इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि महिलाएं अपने परिवार और समाज में सम्मानजनक और सशक्त भूमिका निभा सकें।

हालांकि मुख्यमंत्री ने 5 हजार रुपये की राशि को लेकर कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा और दिशा दोनों साफ हैं। आर्थिक संसाधनों और व्यवस्थाओं को मजबूत करते हुए यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि लाड़ली बहना योजना आने वाले वर्षों में और विस्तारित रूप ले सकती है।

विशेष सत्र में दिए गए इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को दीर्घकालिक मिशन के रूप में देख रही है। लाड़ली बहना योजना को लेकर मुख्यमंत्री का यह आश्वासन न केवल महिलाओं के लिए उम्मीद का संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब और किस चरण में इस लक्ष्य को साकार करती है।

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