By: Ravindra Sikarwar
रायपुर: छत्तीसगढ़ में सामने आए करीब 3200 करोड़ रुपये के बहुचर्चित शराब घोटाले के बाद राज्य सरकार ने आबकारी व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार, नकली होलोग्राम और अवैध शराब कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के उद्देश्य से सरकार ने अब शराब बोतलों पर लगने वाले होलोग्राम की व्यवस्था ही बदल दी है। नए फैसले के तहत अब राज्य में बिकने वाली प्रत्येक शराब बोतल पर लगने वाला हाई-सिक्योरिटी होलोग्राम महाराष्ट्र के नासिक स्थित नोट प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाएगा। इस फैसले के साथ छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
दरअसल, शराब घोटाले की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में नकली होलोग्राम के जरिए बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। नकली होलोग्राम लगाकर न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि अवैध शराब का कारोबार भी फलता-फूलता रहा। इसी कड़ी में सरकार ने यह महसूस किया कि जब तक होलोग्राम व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाना संभव नहीं होगा।
इसी सोच के तहत आबकारी विभाग ने पूरी प्रणाली को नए सिरे से डिजाइन किया है। नई व्यवस्था में शराब की हर बोतल पर सात लेयर वाला हाई-सिक्योरिटी होलोग्राम लगाया जाएगा। यह होलोग्राम अत्याधुनिक तकनीक से तैयार होगा, जिसकी नकल करना लगभग असंभव माना जा रहा है। सात परतों वाले इस होलोग्राम में कई ऐसे सुरक्षा फीचर होंगे, जिनकी मदद से किसी भी तरह की छेड़छाड़ या फर्जीवाड़े को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल नकली होलोग्राम का खेल खत्म होगा, बल्कि अवैध शराब पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाएगा।
सरकार के इस फैसले का एक अहम पहलू यह भी है कि होलोग्राम की छपाई अब किसी निजी एजेंसी या ठेकेदार के जरिए नहीं होगी। पहले टेंडर प्रक्रिया के जरिए निजी कंपनियों को यह जिम्मेदारी दी जाती थी, जहां कमीशनखोरी और दलाली की आशंका बनी रहती थी। अब टेंडर सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और आबकारी विभाग सीधे केंद्र सरकार की इकाई नासिक नोट प्रिंटिंग प्रेस से काम करेगा। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।
होलोग्राम की छपाई पर सालाना लगभग 75 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस राशि का बोझ राज्य के खजाने पर नहीं पड़ेगा। यह पूरा खर्च शराब बॉटलिंग कंपनियां सीधे नासिक नोट प्रिंटिंग प्रेस को वहन करेंगी। इस तरह सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी नहीं आएगा और व्यवस्था ज्यादा प्रभावी ढंग से लागू हो सकेगी।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस नई प्रणाली के लागू होने से आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार आएगा। नकली होलोग्राम, अवैध शराब और राजस्व चोरी जैसी समस्याओं पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। साथ ही इससे राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि जब व्यवस्था पारदर्शी होगी और नियंत्रण मजबूत होगा, तो ईमानदार कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और अवैध गतिविधियों पर स्वतः ही अंकुश लग जाएगा।
कुल मिलाकर, शराब घोटाले के बाद लिया गया यह फैसला छत्तीसगढ़ सरकार की उस मंशा को दर्शाता है, जिसमें वह आबकारी व्यवस्था को पूरी तरह साफ-सुथरा और भरोसेमंद बनाना चाहती है। नासिक नोट प्रिंटिंग प्रेस में होलोग्राम छपवाने का निर्णय न केवल तकनीकी रूप से मजबूत है, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
