Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जो पूरे समाज को झकझोर कर रख देने वाली है। एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर बेटा अपने बुजुर्ग माता-पिता की निर्मम हत्या कर उनके शवों को टुकड़ों में काटकर नदी में फेंक देता है। यह क्रूर अपराध परिवारिक विवादों की उस चरम सीमा को दर्शाता है जहां रिश्तों की डोर पूरी तरह टूट जाती है और इंसानियत शर्मसार हो जाती है।

घटना जौनपुर के अहमदपुर गांव की है, जहां रहने वाले सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी श्याम बहादुर (62 वर्ष) और उनकी पत्नी बबीता (60 वर्ष) रहते थे। उनके बेटे अम्बेश कुमार, जो बीटेक पास करके कोलकाता में एक कंपनी में क्वालिटी इंजीनियर के रूप में काम करता था, ने ही इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। पुलिस जांच से पता चला है कि अम्बेश ने 8 दिसंबर की रात को अपने माता-पिता पर हमला किया। पहले उसने मां बबीता पर लोहे के सिलबट्टे से कई वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जब पिता श्याम बहादुर ने पुलिस को फोन करने की कोशिश की, तो अम्बेश ने उन पर भी हमला बोल दिया और गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद अम्बेश ने अपराध के सबूत मिटाने की पूरी योजना बनाई। घर में मौजूद आरी की मदद से उसने दोनों शवों को कई टुकड़ों में काट दिया। अलग-अलग रिपोर्ट्स में टुकड़ों की संख्या छह से दस तक बताई जा रही है। इन टुकड़ों को सीमेंट की बोरी या बोरे में भरकर उसने अपनी स्विफ्ट डिजायर कार में रखा। सुबह चार-पांच बजे के बीच वह बेलवा पुल से गोमती नदी में अधिकांश टुकड़े फेंक आए। एक टुकड़ा रह गया था, जिसे उसने बाद में जालालपुर में सई नदी में डाल दिया। अपराध के बाद कार को डिटर्जेंट से अच्छी तरह धोया ताकि कोई निशान न रहे।

इस घटना की जड़ें परिवार में लंबे समय से चले आ रहे विवादों में छिपी हैं। अम्बेश ने कोविड महामारी के दौरान कोलकाता में एक मुस्लिम महिला से प्रेम विवाह किया था। इस अंतर-धार्मिक विवाह को उसके माता-पिता ने कभी स्वीकार नहीं किया। वे लगातार बेटे पर दबाव डालते रहे कि वह अपनी पत्नी को तलाक दे दे। दंपति के दो बच्चे भी हैं, लेकिन विरोध जारी रहा। हाल ही में अम्बेश और उसकी पत्नी अलग होने का फैसला कर चुके थे, और पत्नी ने पांच लाख रुपये का मुवावजा मांगा था। इसी पैसे और संपत्ति के बंटवारे को लेकर भी परिवार में तनाव था। माता-पिता की जिद और बेटे की बढ़ती कुंठा ने आखिरकार इस खौफनाक परिणति को जन्म दिया।

घटना का खुलासा तब हुआ जब 13 दिसंबर को अम्बेश की बड़ी बहन वंदना ने थाने में माता-पिता के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवार वालों को अम्बेश का व्यवहार संदिग्ध लग रहा था। वह बार-बार टालमटोल कर रहा था। पुलिस ने तीन टीमों का गठन किया और जांच शुरू की। अम्बेश 12 दिसंबर से कुछ दिन गायब रहा, वाराणसी के घाटों और जौनपुर रेलवे स्टेशन के आसपास घूमता रहा। आखिरकार 15 दिसंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने पूरा अपराध कबूल कर लिया। पुलिस ने अपराध स्थल का पुनर्निर्माण भी कराया और हत्या में इस्तेमाल सिलबट्टा तथा आरी बरामद की। गोमती नदी से पिता के शव का एक हिस्सा भी मिला है, जबकि बाकी हिस्सों की तलाश जारी है।

यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज में बढ़ते तनावों का भी आईना है। अंतर-धार्मिक विवाह आज भी कई परिवारों में कलह का कारण बनते हैं। माता-पिता की जिद और संतान की कुंठा जब मिलती है, तो ऐसे दर्दनाक हादसे हो जाते हैं। पुलिस अब अम्बेश से और पूछताछ कर रही है और संपत्ति व पैसे के विवाद की गहराई तक जांच कर रही है। समाज को सोचना होगा कि रिश्तों में सहनशीलता और समझौते की कितनी जरूरत है, वरना ऐसे अपराध बढ़ते जाएंगे।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि परिवार की नींव प्यार और विश्वास पर टिकी होती है। जब ये कमजोर पड़ते हैं, तो सब कुछ तबाह हो जाता है। जौनपुर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाया, लेकिन खोए हुए जीवन कभी वापस नहीं आएंगे। श्याम बहादुर और बबीता जैसे बुजुर्गों की यह दर्दनाक मौत पूरे प्रदेश को शर्मिंदा करने वाली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *