By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक अनुपम संतुलन स्थापित करने वाली पहल ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भोपाल-जबलपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-45 (एनएच-45) के एक विशेष खंड को देश का पहला वन्यजीव सुरक्षित राजमार्ग बनाया है। यह हिस्सा नरसिंहपुर और जबलपुर के बीच वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य) से गुजरता है, जहां जंगलों और पहाड़ियों के बीच वन्यजीवों की नियमित आवाजाही होती है। इस क्षेत्र में पहले सड़क दुर्घटनाएं आम थीं, क्योंकि तेज रफ्तार वाहन और जानवरों का आमना-सामना अक्सर घातक साबित होता था। अब एनएचएआई की नवोन्मेषी तकनीक से इस समस्या का समाधान खोजा गया है, जो न केवल जानवरों की रक्षा कर रही है बल्कि चालकों की सुरक्षा भी बढ़ा रही है।

इस परियोजना की सबसे खास विशेषता है **टेबलटॉप रेड मार्किंग**। लगभग 2 किलोमीटर के घाट सेक्शन पर सड़क की सतह पर 5 मिलीमीटर मोटी लाल रंग की परत चढ़ाई गई है। यह परत थोड़ी ऊंची उठी हुई होती है, जिससे वाहन जब इस पर से गुजरते हैं तो हल्का कंपन या झटका महसूस होता है। इससे चालक स्वतः ही अपनी गति कम कर लेते हैं, बिना किसी स्पीड ब्रेकर की जरूरत के। लाल रंग का चुनाव भी सोचा-समझा है – यह खतरे का प्रतीक होने से मनोवैज्ञानिक रूप से ड्राइवरों को सतर्क कर देता है। दूर से देखने पर यह लाल पट्टी बेहद आकर्षक लगती है और ड्रोन से ली गई तस्वीरों में तो यह जंगल के हरे भरे परिदृश्य के बीच एक जीवंत रिबन जैसी दिखाई देती है।
यह प्रयोग कुल 11.9 किलोमीटर लंबे हाईवे विस्तार प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसकी लागत करीब 122 करोड़ रुपये है। इस पूरे खंड में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 25 अंडरपास बनाए गए हैं। ये अंडरपास उन स्थानों पर विशेष रूप से निर्मित किए गए हैं जहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, सांभर, नीलगाय और अन्य जानवरों की सबसे ज्यादा मूवमेंट होती है। साथ ही हाईवे के दोनों किनारों पर चेन-लिंक बाड़ लगाई गई है, ताकि जानवर सीधे सड़क पर न आएं और अंडरपास का ही इस्तेमाल करें। सड़क के किनारों पर सफेद शोल्डर लाइनें भी बनाई गई हैं, जो वाहनों को लेन में रखने और किनारे पर जाने से रोकने में मदद करती हैं। रात के समय दुर्घटनाओं को कम करने के लिए स्पीड डिटेक्टर डिवाइस और अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था भी जोड़ी गई है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण वन्य क्षेत्रों में से एक है, जहां बाघों की संख्या बढ़ रही है और अन्य वन्यजीव भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पहले इस क्षेत्र को ‘ब्लैक स्पॉट’ या दुर्घटना संभावित जोन माना जाता था। अब इन उपायों से न केवल वन्यजीवों की जान बच रही है बल्कि मानव जीवन भी सुरक्षित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में सैकड़ों वन्यजीव मारे गए थे, लेकिन इस नई व्यवस्था से ऐसी घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। अगर परिणाम सकारात्मक रहे – जैसे दुर्घटनाओं में कमी और मार्किंग की टिकाऊपन – तो इसे देश के अन्य वन्यजीव संवेदनशील राजमार्गों पर भी लागू किया जाएगा। यह पहल एनएचएआई की ‘ग्रीन हाईवे’ नीति का बेहतरीन उदाहरण है, जो सड़क निर्माण को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर देती है। विकास की रफ्तार में प्रकृति को नुकसान न पहुंचे, बल्कि दोनों का सामंजस्य बने – यही इस परियोजना का मूल मंत्र है।
यह अनोखी लाल सड़क न सिर्फ सुरक्षा की गारंटी दे रही है बल्कि पर्यावरण प्रेमियों और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के लिए एक नई प्रेरणा भी बन गई है। मध्य प्रदेश ने एक बार फिर साबित किया है कि आधुनिक तकनीक से पारंपरिक चुनौतियों का समाधान संभव है। आने वाले समय में ऐसे और राजमार्ग देखने को मिलें, तो भारत का वन्यजीव संरक्षण और मजबूत होगा।
