By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा इलाका है, जहां कभी हिंदू और मुस्लिम परिवार मिल-जुलकर रहते थे, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। पुराने सुभाष नगर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी अभिरुचि पार्क-2 में अब मुस्लिम परिवारों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि हिंदू घरों की तादाद घटकर महज दो रह गई है। इनमें से एक घर अधिवक्ता वीणा गौतम और उनके परिवार का है। वीणा गौतम ने इस बदलाव को लेकर गहरी चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि क्षेत्र में रह रहे कुछ लोग उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत रखते हैं।
वीणा गौतम एक अनुभवी वकील हैं और सोसायटी की अध्यक्ष भी हैं। उनके पति संदीप गौतम मनरेगा योजना में सरकारी नौकरी करते हैं। यह घर साल 1980 में उनके ससुर एस.पी. गौतम ने खरीदा था। परिवार लंबे समय से यहां रह रहा है। वीणा का कहना है कि बचपन से ही उन्हें समाजसेवा का संस्कार मिला है। उनके पिता खूबचंद गोलिया देवास जिले की सोनकच्छ विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। पहले वे नरेला विधानसभा क्षेत्र में विधि प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष भी रही हैं। ऐसे में वे इलाके की समस्याओं को करीब से समझती हैं और आवाज उठाती रही हैं।
उनका आरोप है कि पिछले डेढ़ दशक में क्षेत्र की जनसंख्या में बड़ा परिवर्तन आया है। पहले यहां हिंदू परिवारों की अच्छी-खासी संख्या थी, लेकिन अब ज्यादातर परिवार अन्य जगहों पर चले गए हैं। जो बचे हैं, उन पर अपनी संपत्ति सस्ते दामों में बेचने का दबाव डाला जा रहा है। वीणा गौतम ने बताया कि उनके पड़ोसी सैयद सद्दाम अली से पुरानी दुश्मनी के कारण उन्हें बार-बार परेशान किया जाता है। घर के बाहर असामाजिक तत्व हंगामा करते हैं, जिसके वीडियो और फोटो उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने ये सबूत विभिन्न जगहों पर साझा भी किए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत करने पर पुलिस ने उनकी बजाय आरोपी पक्ष का साथ दिया। कई बार डायल-100 को कॉल करने के बाद ऐशबाग थाने की टीम आई, लेकिन मौका देखकर बिना कोई एक्शन लिए चली गई। वीणा का कहना है कि उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि उल्टा उन्हें और उनके पति को थाने की बदमाशों वाली लिस्ट में डाल दिया गया। थाने के निरीक्षक और सब-इंस्पेक्टर ने मिलकर यह कार्रवाई की, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की बदलती तस्वीर को दिखाता है। इलाके में तनाव का माहौल बन गया है, जिससे रहने वाले लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वीणा गौतम जैसी महिलाएं जो समाजसेवा और कानूनी लड़ाई में सक्रिय हैं, वे भी अब दबाव में हैं। उनका मानना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो बचे-खुचे हिंदू परिवार भी मजबूरन यहां से जाना पड़ सकता है।
यह स्थिति भोपाल के कई अन्य इलाकों में भी देखी जा रही है, जहां जनसंख्या का संतुलन बदलने से सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय को डर का माहौल न महसूस हो। वीणा गौतम ने अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है और उम्मीद जताई है कि न्याय मिलेगा।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि शहरों में बढ़ते तनाव और संपत्ति संबंधी विवादों को कैसे रोका जाए। अगर ऐसे मामले बढ़ते गए, तो सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह सभी पक्षों की बात सुने और उचित कदम उठाए। वीणा गौतम की तरह कई लोग अपनी जमीन और घर बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, और उनकी आवाज को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
