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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 16 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई जनकल्याणकारी और विकासोन्मुखी फैसले लिए गए। बैठक की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुई। इन निर्णयों से सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार, सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को राहत, शहरी परिवहन की मजबूती और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों को बल मिलेगा। यह बैठक राज्य सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट मीटिंग भी थी, जिसमें प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया गया।

सबसे महत्वपूर्ण फैसला सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा रहा। मंत्रिमंडल ने विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के बीच के भेद को पूरी तरह समाप्त करने की मंजूरी दी। पहले कर्मचारियों को कई श्रेणियों जैसे नियमित, संविदा, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन, कार्यभारित आदि में बांटा जाता था, जो सेवा शर्तों, वेतन और पेंशन में असमानता पैदा करता था। अब मौजूदा अस्थायी पदों को स्थायी में बदलने के लिए भर्ती नियमों में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इससे कर्मचारियों की कुल श्रेणियां कम होकर मुख्य रूप से नियमित, संविदा और आउटसोर्स तक सीमित रह जाएंगी। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि यह सुधार न्यायालयीन मामलों में आने वाली जटिलताओं को कम करेगा और कर्मचारियों को समान लाभ सुनिश्चित करेगा। विशेष रूप से कार्यभारित कर्मचारियों के लिए नया प्रावधान जोड़ा गया है कि सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नियमित नियुक्ति मिलेगी। यह कदम हजारों कर्मचारियों के लिए राहत भरा साबित होगा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाएगा।

डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा राहत पैकेज स्वीकृत किया गया। अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही अपर नर्मदा, राघवपुर बहुउद्देशीय और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के लिए 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मंजूर हुआ। इन परियोजनाओं की कुल लागत 5,512 करोड़ रुपये से अधिक है, जो 71,967 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ाएंगी और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी। इससे करीब 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिनमें से अनुसूचित जाति और जनजाति के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। प्रत्येक प्रभावित परिवार को विशेष पैकेज के तहत 12.50 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। यह फैसला विकास कार्यों और प्रभावितों के पुनर्वास के बीच संतुलन बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शहरी विकास के क्षेत्र में भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 90.67 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इस प्रस्ताव से मेट्रो सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा, जिससे दोनों शहरों में यातायात व्यवस्था मजबूत होगी और प्रदूषण कम होगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने बैठक से पहले मंत्रियों को इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सालय (एमवाई अस्पताल) के नवनिर्माण की जानकारी दी। 773 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 1,450 बेड वाला आधुनिक अस्पताल होगा, जिसमें नर्सिंग हॉस्टल और ऑडिटोरियम भी शामिल होंगे। यह स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा।

पर्यावरण और वानिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक छह वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। ये केंद्र कृषि विज्ञान केंद्रों की तर्ज पर काम करेंगे और वन क्षेत्र के बाहर वृक्षारोपण, वन भूमि की उत्पादकता बढ़ाने, लकड़ी के उपयोग से अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने तथा कृषि-वानिकी को प्रोत्साहन देने में मदद करेंगे।

युवाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने और इसके लिए 905.25 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई। इस योजना से 18 से 45 वर्ष के युवाओं को 50 हजार से 50 लाख रुपये तक का ऋण आसानी से मिलता है। ग्रामीण विकास के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना में 10 लाख रुपये या इससे अधिक लागत वाले कार्यों की स्वीकृति की अनुमति दी गई, जिससे 693.76 करोड़ रुपये की लागत से करीब 3,810 कार्य पूर्ण हो सकेंगे।

इन फैसलों से स्पष्ट है कि मोहन यादव सरकार कर्मचारी कल्याण,基础设施 विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण पर समान रूप से ध्यान दे रही है। ये कदम राज्य को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

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