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By: Ravindra Sikarwar

ग्वालियर: शहर में धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में आखिरकार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कोतवाली थाना पुलिस ने ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर लोन लेने के बाद फरार हो गया था। यह आरोपी पिछले सात वर्षों से पुलिस की पकड़ से बाहर था और लगातार अपने ठिकाने बदलकर कानून को चकमा दे रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर दो हजार रुपए का नकद इनाम भी घोषित किया गया था।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी का नाम नरेश कुमार है। करीब सात साल पहले उसने खुद को बिजली विभाग में कार्यरत कर्मचारी बताया था। इसी पहचान के आधार पर उसने एक वित्तीय संस्था से लोन लिया। शुरुआती दौर में उसने कुछ समय तक किस्तें जमा कीं, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हुआ। लेकिन कुछ महीनों बाद उसने अचानक किस्तें देना बंद कर दिया और संपर्क से बाहर हो गया।

जब लोन देने वाली संस्था ने उसकी जानकारी की पड़ताल की तो सामने आया कि आरोपी न तो बिजली विभाग का कर्मचारी है और न ही उसने जो दस्तावेज दिए थे, वे पूरी तरह सही थे। इसके बाद संस्थान की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। कोतवाली थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन वह लगातार जगह बदलता रहा और पुलिस की पकड़ में नहीं आया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी बेहद शातिर किस्म का है। वह अलग-अलग शहरों में रहकर मजदूरी और छोटे-मोटे काम करता था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। वह मोबाइल फोन भी बार-बार बदलता रहता था और स्थायी पते का इस्तेमाल नहीं करता था। इन्हीं कारणों से पुलिस को उसे पकड़ने में काफी समय लग गया।

आखिरकार पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया। दो हजार रुपए के इनाम के बाद मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया और तकनीकी सहायता भी ली गई। हाल ही में पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी ग्वालियर क्षेत्र में ही किसी परिचित के यहां छिपकर रह रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस की और एक विशेष टीम का गठन किया गया।

पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर आरोपी नरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है। आरोपी ने बताया कि उसने आसान कमाई के लालच में खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर लोन लिया था। जब किस्तें चुकाने का दबाव बढ़ा तो वह फरार हो गया और लगातार पहचान छिपाकर जीवन यापन करता रहा।

कोतवाली थाना पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज है। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी ने इसी तरह की ठगी अन्य जगहों पर तो नहीं की है।

इस गिरफ्तारी को पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। सात साल पुराने मामले में आरोपी का पकड़ा जाना यह संदेश देता है कि अपराधी चाहे जितने समय तक फरार रहे, कानून से बच नहीं सकता। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी प्रकार का लोन या वित्तीय लेन-देन करते समय दस्तावेजों की पूरी जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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