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By: Ravindra Sikarwar

रायपुर: भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – एसआईआर) की समयसीमा को बढ़ाकर 18 दिसंबर 2025 कर दिया है। इस फैसले से राज्य के उन हजारों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनके फॉर्म अधूरे थे या जरूरी कागजात समय पर जमा नहीं हो पाए थे। छत्तीसगढ़ में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 है। नवंबर अंत तक 1 करोड़ 82 लाख से ज्यादा गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जो प्रक्रिया की तेज गति को दर्शाता है।

इस पुनरीक्षण अभियान में सभी मतदाताओं को तीन श्रेणियों – ए, बी और सी – में बांटा गया है। ‘ए’ श्रेणी में वे लोग शामिल हैं, जिनके सभी दस्तावेज पूर्ण और सही हैं। ‘बी’ श्रेणी वाले मतदाताओं के फॉर्म तो ठीक हैं, लेकिन उनके जमा किए गए प्रमाणपत्रों की अभी जांच बाकी है। सबसे महत्वपूर्ण ‘सी’ श्रेणी में वे मतदाता रखे गए हैं, जिनके मामले में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। राज्य में करीब 8 लाख मतदाता इस श्रेणी में आते हैं, जबकि केवल रायपुर जिले में ही लगभग 80 हजार लोग प्रभावित हैं।

‘सी’ श्रेणी में मुख्य रूप से वे मतदाता हैं, जिनका नाम 2003 की पुरानी मतदाता सूची में दर्ज नहीं था या जिन्होंने पंजीकरण फॉर्म में माता-पिता की वोटर आईडी संबंधी जानकारी नहीं दी। ऐसे लोगों को अब 2003 में संबंधित विधानसभा क्षेत्र का स्थायी निवासी होने का ठोस सबूत देना होगा। साथ ही, जन्म तिथि के आधार पर अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, अगर किसी का जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, तो उसे अपनी जन्म तिथि या स्थान का प्रमाण देना होगा। 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों को खुद के साथ माता-पिता के जन्म स्थान के दस्तावेज चाहिए। वहीं, 2004 के बाद जन्मे युवा मतदाताओं को भी यही प्रमाणपत्र जमा करने होंगे।

यदि निर्धारित तारीख तक ये दस्तावेज जमा नहीं किए गए, तो संबंधित मतदाता का नाम अंतिम सूची से हटाया जा सकता है। सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से इन प्रमाणों को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। निर्वाचन विभाग के अधिकारी मतदाताओं से संपर्क करने के लिए नोटिस के अलावा एसएमएस और फोन कॉल का भी सहारा ले रहे हैं, ताकि कोई पात्र व्यक्ति अनजाने में वंचित न रह जाए।

एसआईआर की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:

– गणना प्रपत्र जमा करने की अवधि: 4 नवंबर से 18 दिसंबर 2025 तक

– प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशन: 23 दिसंबर 2025

– दावा-आपत्ति दाखिल करने की अवधि: 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक

– सत्यापन और सुनवाई: 23 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक

– अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 21 फरवरी 2026

यह अभियान मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने का प्रयास है। अधिकारियों के अनुसार, ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और जांच के दौरान बदलाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी या डुप्लीकेट वोटिंग की संभावना कम होगी, जो लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। हालांकि, कई मतदाता संगठनों ने चिंता जताई है कि सख्त नियमों से कुछ वास्तविक मतदाता भी प्रभावित हो सकते हैं, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहां पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराना मुश्किल होता है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को निर्देश दिए हैं कि वे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाएं और सहायता प्रदान करें। मतदाताओं से अपील है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी चुनाव कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेज जमा करें। यह प्रक्रिया न केवल वोटिंग अधिकार सुरक्षित रखेगी, बल्कि आने वाले चुनावों में स्वच्छ मतदान सुनिश्चित करेगी।

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