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By: Ravindra Sikarwar

सीरिया के मध्य क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक शहर पल्मायरा के निकट 13 दिसंबर 2025 को एक भयावह घटना हुई, जब अमेरिकी और सीरियाई सुरक्षा बलों की संयुक्त गश्त पर एक अकेले हमलावर ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की जान चली गई, जबकि तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे ISIS से जुड़े एक अकेले बंदूकधारी की घात लगाकर की गई कार्रवाई बताया, हालांकि हमलावर की पहचान और उसके संगठन से सीधे संबंधों की जांच अभी जारी है। हमलावर को मौके पर ही सीरियाई बलों ने मार गिराया।

यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी सैनिक ISIS के खिलाफ चल रहे अभियानों के तहत एक महत्वपूर्ण नेतृत्व स्तर की बैठक में शामिल थे। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि यह घटना काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस का हिस्सा थी। घायलों को तुरंत हेलिकॉप्टर से दक्षिण-पूर्वी सीरिया के अल-तनफ अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ले जाया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। सीरियाई मीडिया के अनुसार, हमले में कुछ स्थानीय सुरक्षा कर्मी भी घायल हुए।

यह घटना बशर अल-असद के सत्ता से हटने के एक साल बाद हुई पहली बड़ी वारदात है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचा। दिसंबर 2024 में विद्रोहियों के तेज अभियान के बाद असद रूस भाग गए थे, और तब से सीरिया में अंतरिम सरकार के नेतृत्व में स्थिरता की कोशिशें चल रही हैं। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमला उस इलाके में हुआ जो पूरी तरह अंतरिम सरकार के नियंत्रण में नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घटना पर तीव्र प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह ISIS का अमेरिका और सीरिया दोनों पर हमला है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि इस कायरतापूर्ण कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि घायल सैनिक ठीक हो रहे हैं और अंतरिम राष्ट्रपति अल-शरा इस घटना से बेहद नाराज हैं। ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि अमेरिका और सीरिया मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी बयान जारी कर हमले की निंदा की और कहा कि अमेरिकियों पर हमला करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।

ISIS को 2019 में क्षेत्रीय रूप से हराया जा चुका है, लेकिन उसके स्लीपर सेल अभी भी सीरिया और इराक में सक्रिय हैं। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संगठन के पास हजारों लड़ाके हो सकते हैं जो छिपकर हमले करते रहते हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि हमलावर सीरियाई सुरक्षा बलों का पूर्व सदस्य था, जिसे कट्टरपंथी विचारों के कारण जांच के दायरे में लिया जा रहा था। हालांकि, सीरियाई अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच में हमलावर के ISIS से संबंधों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

अमेरिका 2014 से सीरिया में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है, मुख्य रूप से ISIS के पुनरुत्थान को रोकने के लिए। ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत शुरू हुई यह तैनाती अब मुख्यतः पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीरिया में केंद्रित है, जहां अमेरिकी सैनिक कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) और अब सीरियाई सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 2025 में सैनिकों की संख्या घटाकर लगभग 900-1000 कर दी गई है। हाल के महीनों में अमेरिका और सीरिया की नई सरकार के बीच सहयोग बढ़ा है, जिसमें ISIS के ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाइयां शामिल हैं।

यह हमला सीरिया में सुरक्षा स्थिति की नाजुकता को उजागर करता है। असद के जाने के बाद देश में स्थिरता आई है, लेकिन ISIS जैसे संगठन अभी भी छिपे खतरे बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमले की निंदा की और सीरिया की नई सरकार को समर्थन देने की बात कही। अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने इसे संयुक्त गश्त पर कायराना हमला बताया और कहा कि आतंकवादियों को जड़ से खत्म करने का संकल्प अटल है।

यह घटना मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के लिए चुनौती है। उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और ऐसे हमलों को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाए जाएंगे, ताकि सीरिया स्थायी शांति की ओर बढ़ सके। प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना है, और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना।

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