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By: Ravindra Sikarwar

वंदे मातरम का 150वां वर्ष पूरा होने पर पूरे देश में जिस राष्ट्रीय गीत को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है, उसी गीत को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद के उस बयान ने आग में घी डालने का काम किया जिसमें उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे। इस बयान के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल सा आ गया है और भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्र-विरोधी मानसिकता करार देते हुए जमकर हमला बोला है।

आरिफ मसूद का कहना है कि उनका मजहब उन्हें वंदे मातरम गाने की इजाजत नहीं देता। उनका यह बयान उस समय सामने आया जब विधानसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हो रही थी। मसूद ने कहा कि वे राष्ट्रगान का पूरा सम्मान करते हैं और उसे खड़े होकर गाते हैं, लेकिन वंदे मातरम उनके लिए मजहबी आधार पर स्वीकार्य नहीं है।

इस बयान पर बीजेपी ने कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी। सबसे तीखा और वायरल हमला भोपाल दक्षिण-पश्चिम से विधायक एवं पूर्व गृह मंत्री रामेश्वर शर्मा ने किया। शर्मा ने बिना नाम लिए आरिफ मसूद पर सीधा निशाना साधते हुए कहा,

“ये लोग बताएं कि हिंदुस्तान में मजहब के हिसाब से रहेंगे या हिंदुस्तान के हिसाब से? जब वोट चाहिए तो बिना नहाए मंदिर में घुस जाते हैं, लंबा त्रिपुंड लगवा लेते हैं, चुनरी ओढ़ते हैं, देवी जागरण करवाते हैं, मूर्ति पूजा करते हैं, आरती उतारते हैं, तब मजहब आड़े नहीं आता। लेकिन जैसे ही राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत और भारत माता की जय की बात आती है, तुरंत मजहब याद आ जाता है। ये दोहरा चरित्र नहीं तो क्या है?”

रामेश्वर शर्मा यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “ये वही जिन्ना वाली मानसिकता है जिसने देश का बंटवारा करवाया। स्वार्थ और वोट की राजनीति के लिए ये लोग मजहब से भी बेईमानी करने को तैयार हैं। जब पूरा विश्व और पूरा भारत आज वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, तब ये लोग गाने से इंकार कर रहे हैं। ऐसे लोग भारत माता के प्रति वफादार कैसे हो सकते हैं?”

बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. गुलरेज शेख ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम को मौलाना अबुल कलाम आजाद ने भी स्वीकार किया था। वे संविधान सभा के सदस्य थे और राष्ट्रीय गीत के रूप में इसे मान्यता मिली। जो लोग आज इसे गाने से इनकार कर रहे हैं, वे न तो मौलाना आजाद से बड़े हैं, न राष्ट्रप्रेम में, न ज्ञान में और न ही इस्लाम की समझ में।”

बीजेपी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस हमेशा से वोट बैंक के लिए राष्ट्रहित को भी दांव पर लगाने से नहीं हिचकती। वहीं कांग्रेस ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि आरिफ मसूद का बयान निजी है और पार्टी इसे व्यक्तिगत राय मान रही है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मजहब और राष्ट्रभक्ति के बीच हमेशा टकराव ही रहेगा? या फिर वोट की राजनीति के लिए राष्ट्रगीत के साथ समझौता करने की इजाजत देती रहेगी? मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में इस बयान की गूंज सुनाई दे रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

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