By: Ravindra Sikarwar
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में बुधवार (10 दिसंबर 2025) को उस वक्त भयंकर तनाव पैदा हो गया जब महीनों से शांतिपूर्ण चल रहा किसान आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। सिकंदरपुर और राठीखेड़ा के आसपास के दर्जनों गांवों के किसान पिछले डेढ़ साल से प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ विरोध कर रहे थे, लेकिन बुधवार दोपहर यह गुस्सा पूरी तरह से फट पड़ा।
विवाद की जड़ चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड कंपनी ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड है, जो राठीखेड़ा में 40 मेगावाट क्षमता वाला अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्र स्थापित कर रही है। कंपनी का दावा है कि यह प्लांट केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को मजबूत करेगा और किसानों को धान-गेहूँ के अलावा वैकल्पिक फसलें उगाने का मौका देगा। लेकिन स्थानीय किसान और ग्रामीण इसे अपने अस्तित्व पर हमला मानते हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता पानी की भयंकर खपत और प्रदूषण है। उनका कहना है कि पहले से ही भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है और इतने बड़े प्लांट से निकलने वाला ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम भी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं होता। कई गांवों के लोग डर के मारे पहले ही अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के पास चले गए हैं।
सितंबर 2024 से किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना, महापंचायत और ज्ञापन दे रहे थे। जुलाई 2025 में जब कंपनी ने प्लांट की चारदीवारी बनानी शुरू की तो लोगों का सब्र टूटने की कगार पर पहुँच गया। फिर भी किसानों ने संयम बरता। लेकिन 10 दिसंबर को दोपहर करीब 2 बजे सैकड़ों की संख्या में किसान और ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर साइट पर पहुँचे। देखते-देखते भीड़ ने निर्माणाधीन दीवार को ट्रैक्टरों से तोड़ दिया और अस्थायी ऑफिस में घुसकर आग लगा दी।
पुलिस और प्रशासन पहले से अलर्ट पर था। क्षेत्र में 18 नवंबर से ही धारा 163 (पूर्व में 144) लागू है और इंटरनेट सेवाएँ भी निलंबित हैं। बुधवार को भी चार मजिस्ट्रेट और लगभग 700 पुलिसकर्मी तैनात थे। जैसे ही भीड़ बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ी, पुलिस ने पहले हल्का बल प्रयोग किया, फिर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। जवाब में उग्र भीड़ ने पुलिस और कंपनी की 14 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसक झड़प में क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सहित 70 से अधिक लोग घायल हो गए। कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं।
घटना के बाद पूरे टिब्बी क्षेत्र में भय का माहौल है। प्रशासन ने अतिरिक्त फोर्स तलब कर ली है और इंटरनेट बंदी को और सख्त कर दिया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि वे हिंसा नहीं चाहते थे, लेकिन जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो बात बिगड़ गई। उनका आरोप है कि कंपनी और प्रशासन दोनों मिलकर उनकी आवाज़ दबा रहे हैं। दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी हिंसा करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
शुक्रवार को किसान फिर से महापंचायत करने वाले हैं जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक एथेनॉल प्लांट का प्रोजेक्ट पूरी तरह रद्द नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। इधर, कंपनी ने अभी तक कोई नया बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पहले वह दावा करती रही है कि प्लांट से स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा और प्रदूषण पूरी तरह नियंत्रित रहेगा।
यह मामला अब सिर्फ एक फैक्ट्री का नहीं रह गया है। यह पानी, पर्यावरण, आजीविका और ग्रामीण अस्मिता का सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र हो सकता है या फिर कोई समझौता हो जाए, यह देखना बाकी है। फिलहाल हनुमानगढ़ का टिब्बी इलाका तनाव के साये में है और लोग दहशत में जी रहे हैं।
