By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल और आदिवासी बहुल धार-झाबुआ क्षेत्र के लिए रेलवे का लंबा इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है। इंदौर से गुजरात के दाहोद तक बन रही 204.76 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन पर मार्च 2026 तक पहली यात्री ट्रेन चलने की संभावना बन गई है। यह परियोजना साल 2008 में स्वीकृत हुई थी और 2013 में इसका काम शुरू हुआ था, लेकिन पहाड़ी इलाका, लंबी सुरंग और भूमि अधिग्रहण जैसी कई बाधाओं के कारण इसमें बार-बार देरी होती रही। अब रेलवे ने गति पकड़ ली है और सबसे मुश्किल माने जाने वाले टीही टनल का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
फरवरी 2026 तक टीही टनल का काम पूरा होने की उम्मीद
परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा 2.95 किलोमीटर लंबी टीही टनल है। अधिकारियों के अनुसार, इस टनल का 1.87 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह बन चुका है और बाकी हिस्से में अंदरूनी दीवारों की फिनिशिंग, लाइटिंग और ड्रेनेज का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। पानी की निकासी के लिए 150 एमएम और 400 एमएम व्यास की मजबूत लोहे की पाइपलाइन बिछाई जा रही है। हर 50 मीटर पर मेनहोल बनाए गए हैं, ताकि बारिश के मौसम में भी टनल में पानी न जमा हो। अगर पाइप में कीचड़ या मलबा जमा हो जाए तो हाई-प्रेशर एयर मशीन से उसे तुरंत साफ किया जा सकेगा। टनल पूरा होने के बाद इसके अंदर बैलास्ट-लेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाला आधुनिक ट्रैक) बिछाया जाएगा, जो तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए ज्यादा सुरक्षित और कम रखरखाव वाला होता है।
रेलवे अधिकारियों का दावा है कि फरवरी 2026 तक टीही-धार सेक्शन का सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) निरीक्षण हो जाएगा और मार्च 2026 से इस रूट पर नियमित ट्रेन सेवाएं शुरू हो सकती हैं।
अभी तक कितना काम पूरा हुआ?
परियोजना के दोनों सिरों से काम तेजी से हुआ है। इंदौर से टीही तक 21 किमी और दाहोद से कटवाड़ा तक 11.30 किमी रेल लाइन पहले ही चालू हो चुकी है। कुल मिलाकर 32.30 किमी से अधिक हिस्सा तैयार है। बीच के सबसे कठिन हिस्से टीही से धार तक ट्रैक लिंकिंग, वेल्डिंग और सिग्नलिंग का काम भी अंतिम चरण में है।
यात्रियों और उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी लाइन
यह नई रेल लाइन इंदौर को सीधे वडोदरा, सूरत और मुंबई से जोड़ेगी। अभी इंदौर से वडोदरा या मुंबई जाने के लिए रतलाम होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे दूरी और समय दोनों ज्यादा लगते हैं। इस नई लाइन के चालू होने से इंदौर-मुंबई की रेल दूरी करीब 55 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय 2 से 3 घंटे तक घट जाएगा।
सबसे बड़ा फायदा पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को होगा। यहां की फैक्ट्रियां माल को सस्ते और तेज तरीके से मुंबई, कांडला और अन्य बंदरगाहों तक भेज सकेंगी। माल ढुलाई की लागत घटने से उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
आदिवासी क्षेत्रों का पहला रेल कनेक्शन
धार और झाबुआ जिले अब तक रेल नेटवर्क से पूरी तरह कटे हुए थे। इन इलाकों में पहली बार रेल सुविधा आने से स्थानीय लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के नए अवसर मिलेंगे। खासकर आदिवासी बहुल गांवों के युवाओं को बड़े शहरों तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी आएगी और पलायन की समस्या पर भी कुछ हद तक लगाम लगेगी।
बढ़ चुकी है परियोजना की लागत
शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1873 करोड़ रुपये थी, लेकिन देरी और महंगाई के कारण अब यह राशि और बढ़ने की संभावना है। फिर भी रेलवे ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना में शामिल कर रखा है और दिन-रात काम करवाया जा रहा है।
निमाड़ और मालवा के लोगों के लिए यह रेल लाइन सिर्फ एक ट्रैक नहीं, बल्कि विकास की नई पटरी है। 17 साल का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और मार्च 2026 में जब पहली ट्रेन धार स्टेशन पर रुकेगी, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पल होगा।
