By: Ravindra Sikarwar
देश की राजधानी दिल्ली इस वर्ष एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। पहली बार दिवाली का मुख्य उत्सव पारंपरिक तिथि से अलग दिसंबर माह में भव्य रूप से मनाया जाएगा। दिल्ली सरकार और केंद्रीय सांस्कृतिक संगठनों की संयुक्त पहल के तहत यह आयोजन यूनेस्को की Intangible Cultural Heritage (ICH) सूची में दिवाली को शामिल कराने की कोशिशों को मजबूती देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता के इस महत्वपूर्ण पर्व को वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए यह आयोजन एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यूनेस्को सूची में क्यों हो रहा जोर?
दिवाली केवल भारत का त्योहार नहीं रहा, बल्कि अब यह दुनिया के कई देशों में भारतीय समुदाय और स्थानीय लोगों के बीच उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे अंधकार से प्रकाश की विजय के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने से—
- दिवाली की विश्व स्तर पर सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी
- भारत की पारंपरिक कलाओं, रीति-रिवाजों और आध्यात्मिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मिलेगा
- वैश्विक सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
- भारतीय प्रवासी समुदाय को सांस्कृतिक गर्व और मान्यता प्राप्त होगी
इन्हीं कारणों से केंद्र और राज्य सरकार दिवाली को वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
दिसंबर में क्यों मनाया जाएगा दिवाली समारोह?
सूत्रों के अनुसार, यूनेस्को टीम अगले महीने दिल्ली में भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करेगी। इसी दौरान सरकार एक विशेष ‘दिसंबर दिवाली उत्सव’ आयोजित करेगी ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को—
- दिवाली से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान
- भारतीय शिल्प, नृत्य, संगीत और संस्कृति
- दीयों, रंगोली और लोक परंपराओं की भव्यता
एक ही मंच पर दिखाई जा सके।
इस कार्यक्रम में देशभर के कलाकार, शिल्पकार और सांस्कृतिक टीमें भाग लेंगी। दिल्ली के कई प्रमुख स्थानों को पारंपरिक दीपों, फूलों, दीयों की सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जगमग किया जाएगा।
विशेष आकर्षण क्या होंगे?
दिसंबर दिवाली उत्सव को एक सांस्कृतिक महाकुंभ के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसमें शामिल हैं—
- विशाल दीप प्रज्वलन समारोह
- देश के विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य और लोकसंगीत
- हस्तशिल्प, दीये, कैंडल और पारंपरिक सजावट का मेला
- रामायण और कृष्ण भक्ति पर आधारित सांस्कृतिक मंचन
- दिवाली की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रदर्शनी
- पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ ‘ग्रीन दिवाली’ थीम
राजधानी के प्रमुख पर्यटक स्थलों—इंडिया गेट, कुतुब परिसर, कनॉट प्लेस और यमुना रिवरफ्रंट को भी रोशनी से सजाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि दिल्ली विश्व स्तर पर दिवाली की सांस्कृतिक जीवंतता को प्रदर्शित करने का केंद्र बने।
आर्थिक और पर्यटन लाभ भी मिलेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन दिल्ली के लिए आर्थिक दृष्टि से भी शुभ संकेत देगा। सैकड़ों शिल्पकार, बाजार व्यापारी, टूर ऑपरेटर और सांस्कृतिक समूहों को इससे लाभ मिलेगा। दिसंबर में दिल्ली में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं, जिससे त्योहार की भव्यता वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभाव डाल सकेगी।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन
सरकार का मानना है कि दिवाली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। दिसंबर में होने वाला यह आयोजन दुनिया को भारतीय संस्कृति की विविधता, समृद्धि और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा।
दिवाली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने का यह प्रयास भारत के सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। अगर यह पहल सफल होती है, तो दिवाली को विश्व की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में स्थान मिलेगा—जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होगा।
