New Maa Vagdevi Saraswati Oil Painting Seized ASI - 1
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By:Ravindra Sikarwar

धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला में पिछले सप्ताह मां वाग्देवी के तेल चित्र को लेकर जन्मा विवाद आखिरकार मंगलवार को समाप्त हो गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा गर्भगृह से हटाए गए इस चित्र को मंगलवार सुबह पुनः उसी स्थान पर पाया गया, जहां यह वर्षों से स्थापित था। चित्र की वापसी के साथ ही हिंदू समाज में उत्साह और संतोष की भावना स्पष्ट दिखाई दी।

सुबह-सुबह बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे, जहां उन्होंने सत्याग्रह के दौरान नियमित रूप से किए जाने वाले पूजन का आयोजन किया। इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ, मां वाग्देवी की आरती और भजन कीर्तन हुए। वातावरण में सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था की छाप स्पष्ट दिखी।

कैसे शुरू हुआ था विवाद?
भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया ने बताया कि यह विवाद 2 दिसंबर से शुरू हुआ था, जब सत्याग्रह के दौरान ASI के सुरक्षा कर्मियों ने गर्भगृह से लगे चित्र को “नया” बताते हुए उसे जब्त कर लिया था। समिति का कहना था कि चित्र नया नहीं, बल्कि पुराने चित्र का नवीनीकरण है।

जलोदिया के अनुसार, 15 साल पुराने चित्र की फ्रेमिंग खराब हो चुकी थी, इसलिए आगामी बसंत पंचमी की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए पुराने स्वरूप का एक नया चित्र तैयार कर वहां लगाया गया था। लेकिन ASI ने इसे पूरी तरह नया चित्र समझकर कब्जे में ले लिया, जिससे समाज में असंतोष पनपा।

समाज और प्रशासन की बातचीत से सुलझा मामला
विवाद बढ़ने के बाद समिति के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर और एसपी से मुलाकात की। प्रशासन ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति स्पष्ट की। बताया गया कि ASI को चित्र के नवीनीकरण की जानकारी नहीं थी, जिसके कारण गलतफहमी पैदा हुई।

मंगलवार सुबह जब समाजजन पूजा की तैयारी कर रहे थे, तभी गर्भगृह में पूजन सामग्री के साथ मां वाग्देवी का वही चित्र पुनः स्थापित पाया गया। इसे देखकर श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ पड़ी। लोगों ने इसे समाज की भावनाओं की जीत बताया।

समिति के महामंत्री सुमीत चौधरी ने बताया कि भोजशाला में सत्याग्रह की परंपरा 1992 से जारी है। उस समय ताले खुलवाने के लिए संघर्ष प्रारंभ हुआ था और पूजा बाहर से की जाती थी। वर्ष 2003 में गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद से हर मंगलवार सत्याग्रह के रूप में पूजा-अर्चना जारी है।

चौधरी ने बताया कि मां वाग्देवी की प्राचीन मूर्तियों में से एक लंदन स्थित संग्रहालय में और दूसरी ग्वालियर में सुरक्षित है। ऐसे में भोजशाला में स्थापित यह चित्र श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए इसके हटाए जाने से समाज में असंतोष था, लेकिन अब इसकी पुनर्वापसी से सभी प्रसन्न हैं।

सत्याग्रह में भारी संख्या में शामिल हुए लोग
मंगलवार को जैसे ही चित्र के वापस मिलने की खबर फैली, बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। ASI और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल तैनात किया था, जिसमें डीएसपी आनंद तिवारी के नेतृत्व में अधिकारियों ने निगरानी संभाली।

पूजन, आरती और भजन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया। पूरा परिसर धार्मिक रंग में रंगा दिखाई दिया और लोगों ने चित्र की वापसी को सकारात्मक संदेश बताया।

विवाद समाप्त, लेकिन कई सवाल बाकी
हालांकि चित्र की वापसी से विवाद थम गया है, मगर यह मामला ASI और समाज के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। समिति का कहना है कि भविष्य में किसी भी बदलाव या मरम्मत के दौरान सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की गलतफहमियों से बचा जा सके।

अभी फिलहाल, मां वाग्देवी के चित्र की पुनर्स्थापना ने भोजशाला में शांति और संतोष का वातावरण लौटा दिया है, और श्रद्धालु एक बार फिर नियमित पूजा-अर्चना में जुट गए हैं।

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