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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम् को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और किसी दूसरे को अपनी पूजा में शामिल नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि “मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क कभी स्वीकार नहीं।” मौलाना मदनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के वंदे मातरम् गाने या पढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान अपनी धार्मिक आस्था के विरुद्ध जाकर किसी की पूजा नहीं कर सकता। उनके अनुसार कुछ पंक्तियां इस्लामी विश्वास के खिलाफ जाती हैं, इसलिए मुसलमान इसे गाने से परहेज करते हैं।


धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान का हवाला

मौलाना मदनी ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय का भी स्पष्ट मत है कि किसी नागरिक को उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ किसी गीत या नारे को गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि देश से मोहब्बत और पूजा करना दो अलग-अलग बातें हैं। मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है, क्योंकि आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है।


1937 के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख

मौलाना मदनी ने 1937 के कांग्रेस अधिवेशन का हवाला देते हुए कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर उस समय यह तय हुआ था कि वंदे मातरम् के केवल पहले दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया जाए। इसके पीछे कारण यह था कि बाकी पंक्तियां एकेश्वरवादी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज उसी ऐतिहासिक सच्चाई को नजरअंदाज कर पूरे गीत को जबरन थोपने की कोशिश की जा रही है, जो देश की एकता की भावना के खिलाफ है।


वंदे मातरम् की धार्मिक व्याख्या पर आपत्ति

मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि “वंदे मातरम्” का अर्थ “माँ की पूजा” से जुड़ा है और इसमें देवी दुर्गा की स्तुति की भावना झलकती है। जबकि इस्लाम केवल एक ईश्वर की उपासना की अनुमति देता है। उनके अनुसार किसी भी रूप में अल्लाह के अलावा किसी के सामने झुकना इस्लामी सिद्धांतों के विरुद्ध है।


संसद की प्राथमिकताओं पर भी उठाए सवाल

मौलाना मदनी ने यह सवाल भी उठाया कि क्या देश में गंभीर आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के बजाय केवल ऐसे विवादित विषयों पर ही बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है, लेकिन उस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। धार्मिक मुद्दों को चुनावी फायदे के लिए उछाला जा रहा है, जो समाज को बांटने का काम करता है।


मुख्तार अब्बास नकवी का पलटवार

मौलाना मदनी के बयान पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नकवी ने कहा कि इस तरह की सोच देश के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर वंदे मातरम् को लेकर भ्रम फैला रहे हैं और समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। नकवी ने यह भी कहा कि यदि किसी को राष्ट्रीय गीत गाने से अपनी आस्था खतरे में लगती है, तो यह मानसिकता देश की एकता के लिए नुकसानदायक है।

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