By: Ravindra Sikarwar
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने 2025 में एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत अब वो सभी संस्थाएं — जैसे होटल, कार्यक्रम आयोजनकर्ता, अन्य वेरिफिकेशन-सेवा देने वाले एजेंसियाँ — जो Aadhaar आधारित सत्यापन करना चाहती हैं, उनके लिए पंजीकरण (registration) अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य आधार-कार्ड की फोटोकॉपी लेने और कागजी सत्यापन करने की पुरानी प्रथाओं को समाप्त कर, डेटा दुरुपयोग और गोपनीयता उल्लंघन की आशंकाओं को कम करना है।
नया नियम: क्या बदलेगा?
- UIDAI ने तय किया है कि आधार-वेरिफिकेशन कराने वाली संस्थाओं को अपने आप को पहले पंजीकृत कराना होगा। बिना पंजीकरण वाले होटल, इवेंट-ऑर्गनाइज़र और अन्य सेवा प्रदाता आधार के आधार पर पहचान सत्यापन नहीं कर सकेंगे।
- पुरानी व्यवस्था में अक्सर ग्राहक से आधार कार्ड की फोटोकॉपी ली जाती थी, जिसे जमा करके रिकॉर्ड किया जाता था। अब यह प्रथा बंद की जा रही है। फोटोकॉपी जमा कराने पर पूरी तरह रोक लगेगी।
- इसके स्थान पर डिजिटल सत्यापन को बढ़ावा दिया जाएगा — QR कोड स्कैन, या नए आधिकारिक आधार-ऐप (Aadhaar App) के माध्यम से ऐप-टू-ऐप वेरिफिकेशन। इस तरह ऑफलाइन वेरिफिकेशन भी संभव होगा, बिना डेटा भंडारण या कागजी दस्तावेजों के।
प्राथमिक उद्देश्य: गोपनीयता व सुरक्षा
UIDAI ने कहा है कि यह बदलाव खासतौर पर आधार डेटा के दुरुपयोग, गलत फोटोकॉपी संग्रहण और पहचान से संबंधित धोखाधड़ी को रोकने के लिए है। नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि:
- संस्थाएं आधार की फोटोकॉपी जमा न रखें, जिससे डेटा लीक या चोरी का जोखिम कम होगा।
- वेरिफिकेशन प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और ऐप-आधारित होगी — जिससे उपयोगकर्ता की निजी जानकारी की सुरक्षा बनी रहेगी।
- ऑफलाइन और QR-आधारित सत्यापन की सुविधा से सर्विस प्रोवाइडर को आधार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुचारु रूप से अपनाना आसान होगा।
UIDAI ने इस नई व्यवस्था को जल्द ही लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। CEO भुवनेश कुमार ने कहा है कि नियमों को शीघ्र अधिसूचित किया जाएगा।
किन संस्थाओं को असर पड़ेगा?
इस नए नियम से प्रभावित होने वाली संस्थाओं में शामिल हैं:
- होटल, लॉज — जहां प्रवास के लिए आधार वेरिफिकेशन लिया जाता है।
- इवेंट आयोजक, मेला-प्रवंधक, बैंकिंग या अन्य सेवा प्रदाता जिनके लिए पहचान सत्यापन आवश्यक होता है।
- अन्य निजी सेवा-सेवा प्रदाता जिनके उपयोगकर्ता से पहचान की जानकारी माँगी जाती थी।
अब इन सभी को पहले UIDAI के साथ पंजीकरण करना होगा। बिना पंजीकरण के वे आधार कार्ड से ग्राहक की पहचान नहीं कर सकेंगे।
बदलाव क्यों जरूरी हो गया?
वर्तमान व्यवस्था में अक्सर संस्थाएँ आधार की फोटोकॉपी ले लेती थीं और उसे भौतिक रूप में संग्रहित कर लेती थीं। इससे:
- पहचान-चोरी (identity theft) और फर्जी पहचान (fraud) का खतरा बढ़ जाता था।
- आधार-डेटा का दुरुपयोग (misuse) संभव था — बिना व्यक्ति की जानकारी के।
- उपयोगकर्ता (नागरिक) की गोपनीयता compromised होती थी।
इन चिंताओं को देखते हुए UIDAI ने यह कदम उठाया है, ताकि आधार प्रणाली को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाया जा सके।
कैसे काम करेगा नया तरीका?
- संस्थाएं QR कोड स्कैन करेंगी या Aadhaar App के माध्यम से सत्यापन करेंगी।
- आधार डेटा कागजी रूप में नहीं लिया जाएगा; यानी फोटोकॉपी या हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं होगी।
- ऑफलाइन वेरिफिकेशन के लिए API उपलब्ध होगा — जिससे सर्वर डाउन या इंटरनेट समस्या में भी वेरिफिकेशन किया जा सकेगा।
- आधार धारक की गोपनीयता बनी रहेगी; केवल आवश्यक जानकारी साझा होगी।
UIDAI का यह फैसला, आधार-आधारित सत्यापन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाएगा। कागजी फोटोकॉपी के जमाव और डेटा लीक जैसे खतरों से निजात मिलेगी।
अब यह देखना होगा कि सेवा-प्रदाता संस्थाएं इस बदलाव को कितना जल्दी अपनाती हैं, और आम नागरिकों को इससे कितना लाभ होता है। यदि सब ठीक रहा, तो आधार प्रणाली में भरोसे और सुरक्षा दोनों ही मजबूत होंगे।
