By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों का बिगुल बजने में अभी भले ही डेढ़ साल बाकी हों, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी से कमर कस ली है। प्रदेश सरकार द्वारा नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को मंजूरी मिलते ही आयोग ने महापौर, परिषद अध्यक्ष और पार्षदों के लिए अलग-अलग चुनाव चिह्नों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। यह कदम 2027 में होने वाले निकाय चुनावों की दिशा में सबसे बड़ा और ठोस संकेत माना जा रहा है।
महापौर और अध्यक्षों को मिले 37 नए चिह्न
राज्य निर्वाचन आयोग की नई अधिसूचना के तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के आरक्षित चिह्नों को छोड़कर स्वतंत्र और गैर-मान्यता प्राप्त उम्मीदवारों के लिए अलग से प्रतीक निर्धारित किए गए हैं।
महापौर तथा नगर पालिका/नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कुल 37 चुनाव चिह्न जारी किए गए हैं। इनमें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई रोचक प्रतीक शामिल हैं, जैसे:
नल, टेबल फैन, गुब्बारा, प्रेशर कुकर, गैस सिलेंडर, रोड रोलर, बैटरी टॉर्च, ब्रीफकेस, गैस स्टोव, मटका, रेडियो, स्लेट, बेंच, पीपल का पत्ता, हारमोनियम, बल्लेबाज, सूरजमुखी, गेहूँ की बाली, सब्जियों की टोकरी, खंभे पर ट्यूबलाइट, हाथ चक्की, डबल रोटी, वायलिन, बेलन, दरवाजा आदि।
पार्षदों के लिए 31 अलग चिह्न
निकायों के पार्षद पद के लिए 31 अलग चुनाव चिह्न तय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
केक, कैमरा, गाजर, सिलाई मशीन, स्कूटर, जीप, चारपाई, टेलीफोन, टेलीविजन, कप-प्लेट, बरगद का पेड़, लेटर बॉक्स, अलमारी, हॉकी-गेंद, डीजल पंप, दो तलवार और ढाल, डोली, नारियल का पेड़, कैंची, बाल्टी, फावड़ा, केतली, लेडी पर्स, भोंपू, सेव फल, कोट, टेंट, ब्लैक बोर्ड, कमीज आदि।
इन चिह्नों को इस तरह चुना गया है कि मतदाता आसानी से इन्हें पहचान सकें और याद रख सकें।
प्रत्यक्ष चुनाव से बदलेगा खेल
सबसे बड़ी बदलाव की बात यह है कि अब नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों का चुनाव भी पार्षदों की तरह जनता सीधे करेगी। पहले यह चुनाव परोक्ष तरीके से चुने हुए पार्षद करते थे, लेकिन अब जनता का प्रत्यक्ष मत ही अध्यक्ष तय करेगा। इससे स्थानीय नेताओं में सीधी जवाबदेही बढ़ेगी और जनता को अपना नेता चुनने का पूरा अधिकार मिलेगा।
चुनाव कब होंगे?
वर्तमान निकायों का कार्यकाल जुलाई 2027 में पूरा हो रहा है। मई 2022 में अधिसूचना जारी होने के बाद जुलाई 2022 में पिछले चुनाव हुए थे। पाँच साल का कार्यकाल खत्म होने से करीब 6-8 महीने पहले यानी 2027 के प्रथम चरण में ही चुनाव कराने की पूरी तैयारी है। परिसीमन, आरक्षण और मतदाता सूची संशोधन का काम भी जल्द शुरू होने वाला है।
क्यों शुरू हुई इतनी जल्दी तैयारी?
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी बताते हैं कि पिछले निकाय चुनावों में कई जगहों पर चिह्नों को लेकर विवाद हुआ था और अंतिम समय में जल्दबाजी में चिह्न आवंटित करने पड़े थे। इस बार आयोग ने बहुत पहले से सभी चिह्न तय कर लिए हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई कानूनी अड़चन न आए। साथ ही, नई प्रत्यक्ष प्रणाली के कारण प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियाँ भी पहले से पूरी कर ली जाएंगी।
राजनीतिक दलों में हलचल
चिह्नों की घोषणा के साथ ही भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों में टिकट के दावेदारों की दौड़ तेज हो गई है। खासकर नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पद अब सीधे जनता चुनने वाली है, इसलिए मौजूदा अध्यक्षों पर दबाव बढ़ गया है कि वे पाँच साल का हिसाब जनता को दें। कई शहरों में तो संभावित दावेदार अभी से प्रचार शुरू कर चुके हैं।
मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 282 नगर पंचायतें हैं। इन सभी में एक साथ महापौर, अध्यक्ष और हजारों पार्षदों का चुनाव होगा। राज्य निर्वाचन आयोग की इस सक्रियता से साफ है कि 2027 का नगरीय निकाय चुनाव अब तक का सबसे पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और जन-केंद्रित चुनाव होने जा रहा है।
