By: Ravindra Sikarwar
भोपाल के कोलार क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मदर टेरेसा स्कूल में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत एक युवती ने अपनी जान दे दी। शुक्रवार सुबह उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिवार और पड़ोसियों के मुताबिक वह पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी और लगातार बढ़ रहे शारीरिक दर्द से जूझ रही थी। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है।
कोलार थाना पुलिस के अनुसार, घटना सुबह तब सामने आई जब घरवालों ने कमरे का दरवाज़ा नहीं खुलने पर आवाज लगाई। काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने खिड़की से झांककर देखा, जहां युवती फांसी के फंदे पर झूल रही थी। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुसाइड नोट में युवती ने लिखा है—
“मुझे माफ करना पापा… बहुत कोशिश की, लेकिन अब और दर्द बर्दाश्त नहीं होता। बीमारी ने जिंदगी मुश्किल बना दी है। अब मैं जी नहीं पा रही हूँ।”
नोट में कहीं भी किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह लम्बे समय से मानसिक और शारीरिक तनाव में थी।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी और कई डॉक्टर्स के पास इलाज चलने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। लगातार दर्द और तनाव की वजह से वह डिप्रेशन में चली गई थी। हालांकि परिवार उसे भावनात्मक सहयोग देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह अपनी स्थिति से बाहर नहीं निकल पाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवती शांत स्वभाव की थी और पड़ोसियों से कम ही बात करती थी। स्कूल प्रशासन ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है और कहा कि वह मेहनती और ज़िम्मेदार कर्मचारी थी।
फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। मोबाइल फोन, डायरी और अन्य निजी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं, ताकि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थिति समझी जा सके।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अपील
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारियों से जूझते समय अक्सर लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं और यदि उन्हें समय पर भावनात्मक सहायता और काउंसलिंग न मिल पाए, तो वे इस तरह के कदम उठा लेते हैं।
आत्महत्या कभी समाधान नहीं होता।
जरूरी हेल्पलाइन नंबर:
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 1800-599-0019
- AASRA Suicide Prevention Helpline: +91-9820999800
समाज में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़ा करती है। बीमारी और दर्द झेल रहे लोगों को केवल इलाज ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा और समझ की भी आवश्यकता होती है।
