By: Ravindra Sikarwar
भोपाल: सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का भरोसा लेकर आने वाले गरीब मरीजों के साथ अब खुलेआम धोखाधड़ी हो रही है। डॉक्टरों का एक वर्ग कमीशन के लालच में मरीजों को अधूरा इलाज देकर निजी अस्पतालों की ओर रेफर कर रहा है। भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव (MYH) में चल रहे इस गोरखधंधे का एक मामला तो सामने आ गया है, जिसमें न्यूरोसर्जरी विभाग के एक डॉक्टर को पकड़ा गया। शिकायत मिलने पर उनके 15 दिन का वेतन काटने की सजा दी गई है, लेकिन जानकार बताते हैं कि यह तो महज एक बानगी है; असल खेल बहुत बड़ा है।
रातभर जमीन पर पड़ा रहा मरीज, सुबह कहा – “निजी अस्पताल चले जाओ”
हाल ही में एक मरीज सिर में गंभीर चोट लगने के कारण MY अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हुआ। मरीज के परिजनों का आरोप है कि पूरी रात उन्हें बिना कोई खास इलाज दिए जमीन पर लिटाया गया। सुबह जब न्यूरोसर्जरी विभाग का डॉक्टर आया तो उसने बिना कोई बड़ा टेस्ट कराए सीधे कहा, “यहां ज्यादा कुछ नहीं हो सकता, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज या किसी अच्छे निजी अस्पताल में ले जाओ।” परिजनों को पहले तो लगा कि डॉक्टर मरीज की भलाई के लिए कह रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि इसके पीछे कमीशन का खेल था। परिजनों ने इसकी लिखित शिकायत डीन से की, जिसके बाद डॉक्टर के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हुई और 15 दिन की सैलरी काट ली गई।
10% तक कमीशन, आयुष्मान कार्ड वालों पर खास नजर
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों ने जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला है। निजी अस्पतालों में भर्ती करवाने पर डॉक्टरों को बिल की रकम का 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। खासकर आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारी मरीजों को टारगेट किया जाता है, क्योंकि इनका पूरा खर्च सरकार देती है और निजी अस्पताल को मोटी रकम मिलती है। इसके एवज में डॉक्टर, वार्ड ब्वॉय और कुछ बाहरी एजेंट तक कमीशन बांट लेते हैं।
सूत्रों के मुताबिक रोजाना MY अस्पताल से 10 से 15 मरीज “LAMA” (Leave Against Medical Advice) करवाकर निजी अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज तो सचमुच अपनी मर्जी से जाते हैं, लेकिन ज्यादातर को डॉक्टर या एजेंट डरा-धमकाकर, लालच देकर या झूठ बोलकर ले जाते हैं। कहा जाता है, “सरकारी अस्पताल में बेड नहीं है, मशीन खराब है, डॉक्टर नहीं आ रहे, निजी में तुरंत ऑपरेशन हो जाएगा और आयुष्मान से एक रुपया भी नहीं लगेगा।”
एंबुलेंस गैंग भी सक्रिय
यह खेल सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। अस्पताल परिसर में कुछ प्राइवेट एंबुलेंस वाले और दलालों का गैंग भी सक्रिय है। ये लोग मरीज के परिजनों को पहले छोटी-मोटी जांच (जैसे MLT, एक्स-रे, सीटी स्कैन) सरकारी अस्पताल में ही करवा लेते हैं, फिर कहते हैं कि “अब तो रिपोर्ट भी आ गई, चलो सीधे निजी अस्पताल में भर्ती करवा देते हैं।” एंबुलेंस का किराया भी बाद में निजी अस्पताल बिल में जोड़ देता है, जिसका पूरा पैसा सरकार से वसूल लिया जाता है।
डीन ने बनाई जांच समिति, सख्त कार्रवाई का भरोसा
मामला सामने आने के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने बताया, “एक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है। बहुत जल्द एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा रही है जो LAMA के सभी मामलों की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किन-किन डॉक्टरों या कर्मचारियों की मिलीभगत से मरीज बाहर भेजे जा रहे हैं। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।”
मरीज बोले – गरीब का इलाज सिर्फ कागजों में मुफ्त
जिन मरीजों को इस धोखे का शिकार बनाया गया, उनकी पीड़ा सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक परिजन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने सोचा था सरकारी अस्पताल में सब मुफ्त होगा, लेकिन डॉक्टर ने डराया कि यहां देर हो जाएगी तो मरीज मर जाएगा। मजबूरन निजी अस्पताल गए, वहां दस दिन में 18 लाख का बिल बना दिया। आयुष्मान से सिर्फ 5 लाख ही कवर हुआ, बाकी पैसे कहां से लाएं?”
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की जो व्यवस्था गरीबों के लिए बनाई गई थी, उसे कुछ लालची डॉक्टर और दलाल मिलकर लूट का अड्डा बना रहे हैं। MY अस्पताल का यह मामला सामने आया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रदेश के तमाम बड़े सरकारी अस्पतालों में यही सिलसिला चल रहा है। अब देखना यह है कि जांच समिति कितनी गंभीरता से काम करती है और इस कमीशन के खेल पर लगाम लग पाती है या नहीं।
